झालावाड़ एसआरजी अस्पताल: अधीक्षक ने खुद संभाला पदभार, जारी किए निर्देश
उच्चाधिकारियों के औपचारिक आदेश का इंतजार किए बिना डॉ. अशोक शर्मा ने वेतन भुगतान और विभागीय कामकाज को लेकर जारी किए नए निर्देश।
झालावाड़ के श्री राजेन्द्र सार्वजनिक चिकित्सालय (एस.आर.जी.) में प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ा एक असामान्य मामला सामने आया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक शर्मा ने उच्चाधिकारियों के औपचारिक आदेश और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय 05.11.2026 को स्वयं ही अधीक्षक का पदभार संभालने का आदेश जारी कर दिया। उनके इस कदम ने अस्पताल के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, पूरा मामला दीपावली से पहले कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान से जुड़ा है। राजमेस के उच्चाधिकारियों से फोन पर हुई वार्ता और वित्तीय शक्तियों का हवाला देते हुए डॉ. अशोक शर्मा ने 05.11.2026 को दोपहर पूर्व आदेश जारी किया। इसमें उन्होंने स्वयं को श्री राजेन्द्र सार्वजनिक चिकित्सालय (एस.आर.जी.), झालावाड़ के अधीक्षक का पदभार स्वतः संभालने की घोषणा की।
इस आदेश की खास बात यह रही कि डॉ. शर्मा ने किसी औपचारिक पदभार ग्रहण समारोह या अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया की प्रतीक्षा किए बिना ही कार्यभार संभालने की घोषणा कर दी। आदेश में उन्होंने स्वयं लिखा कि वह अधीक्षक एस.आर.जी. चिकित्सालय झालावाड़ का पदभार स्वतः संभाल रहे हैं।
अपने पदभार ग्रहण से संबंधित आदेश में डॉ. शर्मा ने एक अन्य प्रशासनिक आदेश को भी निरस्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने दिनांक 07.10.2026 के आदेश को नियमानुसार नहीं होने के कारण निरस्त समझे जाने की बात कही। इसके साथ ही डॉ. माधुरी मीणा (प्रोफेसर, मेडिसिन) को अपना मेडिसिन विभाग संभालने के निर्देश जारी कर दिए।
वेतन भुगतान से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर भी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए। बिल शाखा को कहा गया कि चिकित्सकों और कर्मचारियों के वेतन बिल केवल डॉ. अशोक शर्मा के समक्ष हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किए जाएं। यदि किसी अनाधिकृत व्यक्ति ने पहले ही वेतन बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, तो उन्हें वापस मंगवाकर दोबारा उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम पहलू यह है कि डॉ. शर्मा ने अपने ही आदेश के माध्यम से अधीक्षक का पदभार ग्रहण करने के साथ पूर्व आदेश को निरस्त करने और विभागीय जिम्मेदारियों के पुनर्निर्धारण से जुड़े निर्देश भी जारी कर दिए। अब इस स्व-घोषित पदभार ग्रहण आदेश और उससे जुड़े प्रशासनिक निर्देशों पर उच्च अधिकारियों की प्रतिक्रिया को लेकर नजरें टिकी हैं। झालावाड़ अस्पताल का यह मामला प्रशासनिक प्रक्रिया, पदभार ग्रहण और वित्तीय अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर चर्चा का विषय बन गया है।