दूध के बाद फल-सब्जी की आपूर्ति भी बंद: बकानी में किसानों का अनिश्चितकालीन धरना तेज, सरकार को अंतिम चेतावनी

बकानी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और आपदा प्रबंधन राहत कोष की स्वीकृत राशि नहीं मिलने से भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन धरना तेज हो गया है। दूध के बाद फल-सब्जी की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। किसानों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।

Update: 2026-08-03 12:35 GMT

तस्वीर में बकानी तहसील मुख्यालय के मुख्य द्वार के सामने खड़े किसानों का समूह और हाथों में ज्ञापन थामे एक व्यक्ति नजर आ रहा है।

बकानी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्वीकृत राशि तथा आपदा प्रबंधन राहत कोष से मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं होने के विरोध में भारतीय किसान संघ, तहसील बकानी के नेतृत्व में तहसील मुख्यालय के बाहर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। लंबित भुगतान को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है और आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है।



 धरना स्थल से एक दिन पहले किसानों ने गांवों से बकानी कस्बे में दूध की आपूर्ति बंद करने का आह्वान किया था, जिसका व्यापक असर देखने को मिला। सोमवार को कस्बे में दूध की आपूर्ति लगभग पूरी तरह बंद रही। इसके बाद किसानों ने फल एवं सब्जी की आपूर्ति भी बंद करने का आह्वान किया। इस आह्वान को स्थानीय फल एवं सब्जी विक्रेताओं का भी समर्थन मिला। विक्रेताओं ने कहा कि किसान की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है। उनका कहना था कि यदि किसान के पास पैसा रहेगा, तभी बाजार चलेगा और सभी का रोजगार सुरक्षित रहेगा। इसी भावना के साथ किसान आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग मिल रहा है।

भारतीय किसान संघ के अनुसार पिछले कई महीनों से ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन एवं विभिन्न माध्यमों से सरकार, प्रशासन और बीमा कंपनी को लगातार अवगत कराया जा रहा है कि स्वीकृत बीमा एवं मुआवजा राशि शीघ्र किसानों के खातों में जमा कराई जाए। इससे पहले 13 जुलाई से 16 जुलाई तक भी किसानों ने आंदोलन किया था। उस दौरान जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों ने लिखित रूप से चार दिनों के भीतर बीमा राशि एवं आपदा प्रबंधन राहत कोष की राशि किसानों के खातों में जमा कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन लगभग 15 दिन बीत जाने के बाद भी राशि जमा नहीं होने से किसानों ने पुनः अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।

भारतीय किसान संघ ने बताया कि 30 जुलाई को जब किसान अपनी पीड़ा लेकर तहसील मुख्यालय पहुंचे, तब प्रशासन ने मुख्य द्वार पर ताला लगाकर किसानों को प्रवेश से रोक दिया। इससे नाराज किसानों ने मुख्य गेट के बाहर ही अपना पड़ाव डाल दिया और वहीं से अनिश्चितकालीन आंदोलन प्रारंभ कर दिया, जो लगातार जारी है।

धरना दे रहे किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्वीकृत राशि एवं आपदा प्रबंधन राहत कोष से मुआवजा किसानों के खातों में जमा नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

धरना स्थल पर पहुंचे कोटा जिले के जिलाध्यक्ष जगदीश कलमंडा ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते किसानों की जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो किसान अपने परिवार, छोटे-छोटे बच्चों एवं अपने पशुओं के साथ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी सरकार एवं प्रशासन की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के साथ इस प्रकार की हठधर्मिता उचित नहीं है।

इसके बाद किसानों ने तहसील परिसर के दूसरे द्वार से प्रवेश कर तहसीलदार बकानी को अंतिम चेतावनी पत्र सौंपा। किसानों ने कहा कि चार दिनों में भुगतान कराने का समझौता प्रशासन की उपस्थिति में हुआ था, इसलिए अब उस वचन का पालन किया जाए।

धरना स्थल पर भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष रामबाबू पाटीदार, तहसील मंत्री नानूराम लोधा, प्रांत पशुपालन प्रमुख श्रीकिशन पाटीदार, जिला अध्यक्ष राधेश्याम गुर्जर, जिला सह मंत्री मनोहर सिंह चौहान, जिला गौ सेवा प्रमुख बालू सिंह चौहान, जिला प्रचार प्रमुख महेश मेहर, मुकेश पाटीदार, रामगोपाल सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।

सभी किसानों ने एक स्वर में घोषणा की कि जब तक किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की स्वीकृत राशि एवं आपदा प्रबंधन राहत कोष से मुआवजा प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक भारतीय किसान संघ का अनिश्चितकालीन आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।

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