वाराणसी में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ स्टेशन पुनर्विकास मॉडल का निरीक्षण किया।

उत्तर प्रदेश में जल्द ही बुलेट ट्रेन कॉरिडोर आने वाला है। दिल्ली से गुवाहाटी तक प्रस्तावित उत्तरी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को प्रधानमंत्री की मंजूरी मिल चुकी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस कॉरिडोर के निर्माण से दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, काशी और पटना के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुलेट ट्रेन केवल अमीरों के लिए नहीं, बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी होगी। किराये को लेकर विपक्ष की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम पर उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन का किराया हवाई जहाज के किराये से भी कम होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 31 अक्टूबर को काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों और गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के आधुनिकीकरण, नए स्टेशन भवन, कॉनकोर्स, प्लेटफॉर्म और यात्री सुविधाओं के विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। साथ ही नमो गंगा ब्रिज के निर्माण से जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं और कार्यों की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त की।

रेल मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उत्तरी बुलेट कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। यह कॉरिडोर दिल्ली से गुवाहाटी तक तैयार होगा और उत्तर प्रदेश में जल्द ही बुलेट ट्रेन का नेटवर्क आने वाला है। प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत दिल्ली और आगरा के बीच की दूरी महज 59 मिनट में तय की जा सकेगी। दिल्ली से कानपुर पहुंचने में 1 घंटा 59 मिनट और दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में 2 घंटे 12 मिनट लगेंगे। वहीं, काशी से लखनऊ की यात्रा 1 घंटे 21 मिनट और काशी से पटना की यात्रा महज 1 घंटे में पूरी हो सकेगी।

इसी प्रकार काशी से दिल्ली पहुंचने में 3 घंटे 35 मिनट और वाराणसी से आगरा पहुंचने में 2 घंटे 24 मिनट लगेंगे। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बुलेट ट्रेन अमीरों के लिए नहीं, बल्कि गरीब और मध्यम परिवारों के लोगों के लिए भी है। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि किराये को लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है, जबकि बुलेट ट्रेन का किराया फ्लाइट से भी कम होगा।

इसके बाद रेल मंत्री ने काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि स्टेशन को आधुनिक, विश्वस्तरीय और यात्री अनुकूल सुविधाओं से युक्त बनाया जा रहा है। इस परियोजना की स्वीकृत अनुमानित लागत 349.50 करोड़ रुपये है, जबकि 304.61 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आवंटित किया गया है। कार्य आवंटन की तिथि 16 अगस्त, 2023 है। परियोजना का निष्पादन उत्तर रेलवे के निर्माण संगठन की संबंधित इकाई द्वारा किया जा रहा है।

पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन के उत्तर और दक्षिण दिशा में दो आधुनिक स्टेशन भवन बनाए जा रहे हैं। दोनों भवन ग्राउंड प्लस दो मंजिल यानी जी+2 संरचना के होंगे। प्रत्येक भवन का क्षेत्रफल लगभग 10,358 वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है। इसके अलावा करीब 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में विशाल कॉनकोर्स का निर्माण किया जा रहा है। यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए 9 मीटर चौड़ा फुट ओवर ब्रिज, नए प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेड एवं कवरिंग, पैदल यात्रियों के लिए कवर्ड पाथवे और कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग सहित अन्य विकास कार्य भी किए जा रहे हैं।

पुनर्विकास के बाद काशी रेलवे स्टेशन की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में स्टेशन पर 4 रेलवे ट्रैक उपलब्ध हैं, जिन्हें बढ़ाकर 10 किया जाएगा। प्लेटफॉर्म की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 6 की जाएगी। प्रत्येक प्लेटफॉर्म की लंबाई 600 मीटर होगी। स्टेशन पर वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1,954 यात्रियों की क्षमता है, जो पुनर्विकास के बाद बढ़कर 13,261 यात्री प्रतिदिन हो जाएगी। इसी तरह ट्रेनों की संख्या वर्तमान 16 जोड़ी से बढ़कर 36 जोड़ी तक पहुंच सकेगी।

यात्रियों की सुविधा और सुगम आवागमन के लिए स्टेशन पर 30 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर लगाए जाएंगे। फुट ओवर ब्रिज की चौड़ाई मौजूदा 6 मीटर से बढ़ाकर 9 मीटर की जाएगी। वहीं, सीढ़ियों की संख्या 3 से बढ़ाकर 26 की जाएगी। इससे यात्रियों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने और स्टेशन के अलग-अलग हिस्सों में आवागमन करने में आसानी होगी।

स्टेशन पर प्रतीक्षालय और बैठने की व्यवस्था का भी विस्तार किया जा रहा है। उत्तर और दक्षिण स्टेशन भवनों में लगभग 2,300-2,300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्रतीक्षालय विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक प्रतीक्षालय में करीब 650 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसके अतिरिक्त लगभग 5,114 वर्ग मीटर के कॉनकोर्स क्षेत्र में करीब 1,800 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इस तरह कुल लगभग 9,714 वर्ग मीटर क्षेत्र में करीब 3,100 यात्रियों के बैठने की सुविधा उपलब्ध होगी।

स्टेशन परिसर की पार्किंग व्यवस्था को भी व्यापक रूप से विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में यहां 115 ईसीएस (इक्विवेलेंट कार स्पेस) की पार्किंग सुविधा उपलब्ध है। पुनर्विकास योजना के तहत लगभग 10,175 वर्ग मीटर क्षेत्र में 440 ईसीएस की पार्किंग विकसित की जाएगी। भविष्य में इस क्षमता को बढ़ाकर 800 ईसीएस तक करने की योजना भी प्रस्तावित है।

इसके अलावा स्टेशन परिसर में लगभग 66,758 वर्ग मीटर क्षेत्र में बाहरी विकास कार्य किए जाएंगे। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए करीब 2,021 वर्ग मीटर क्षेत्र में कवर्ड पाथवे बनाया जाएगा। वहीं, लगभग 10,622 वर्ग मीटर क्षेत्र में कॉनकोर्स के ऊपर रूफिंग का कार्य प्रस्तावित है। इन विकास कार्यों से स्टेशन परिसर में यात्रियों को मौसम के अनुकूल सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास वाराणसी की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद स्टेशन की यात्री क्षमता, रेल परिचालन और आवागमन व्यवस्था में व्यापक सुधार होगा। आधुनिक स्टेशन भवन, विशाल कॉनकोर्स, विस्तृत प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर, बेहतर प्रतीक्षालय और पार्किंग जैसी सुविधाओं से यात्रियों को बेहतर रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में गंगा नदी पर निर्माणाधीन नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल (नमो ब्रिज) का भी निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यस्थल पर पहुंचकर परियोजना के तहत चल रहे कार्यों, तकनीकी व्यवस्थाओं और निर्माण की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।

यह महत्वपूर्ण रेल-सह-सड़क पुल उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अंतर्गत बनाया जा रहा है। पुल की कुल लंबाई लगभग 1,074.6 मीटर है। इसकी स्वीकृत अनुमानित लागत 1,380.87 करोड़ रुपये है, जबकि निर्माण कार्य के लिए 1,201.37 करोड़ रुपये की लागत से अनुबंध आवंटित किया गया है।

परियोजना के तहत पुल पर कुल 10 स्पैन बनाए जाने हैं। इनमें 108.5 मीटर के 8 स्पैन और 103.3 मीटर के 2 स्पैन शामिल हैं। पुल की आधारभूत संरचना के लिए 9 पियर और 2 एबटमेंट सहित कुल 11 सब-स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए 60 मीटर तक की गहराई वाले डबल-डी वेल का निर्माण भी प्रस्तावित है।

नमो गंगा पुल की प्रमुख विशेषता इस पर रेल और सड़क यातायात के लिए दो अलग-अलग स्तरों की व्यवस्था है। पुल के निचले तल पर रेल परिचालन के लिए कुल चार रेल लाइनें बनाई जा रही हैं। इनमें दो अप और दो डाउन लाइनें शामिल होंगी। इन रेल लाइनों पर 2×25 केवी ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण (ओएचई) प्रणाली स्थापित की जाएगी।

वहीं, पुल के ऊपरी तल पर छह लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग के अनुरूप सड़क मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसमें विद्युत व्यवस्था, क्रैश बैरियर और सड़क सुरक्षा से जुड़ी अन्य आवश्यक सुविधाएं भी शामिल होंगी।

निरीक्षण के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने रेल मंत्री को काशी स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों, निर्माण की प्रगति और यात्रियों के लिए प्रस्तावित सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। काशी स्टेशन के आधुनिकीकरण और नमो गंगा रेल-सह-सड़क पुल का निर्माण वाराणसी में रेल एवं सड़क परिवहन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं।


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