जयपुर में CVI 2026 संगोष्ठी का दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ करते अतिथि और विशेषज्ञ।

जयपुर। बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित पुनर्वास को लेकर दिशा फाउंडेशन एवं साइट फर्स्ट फाउंडेशन की संयुक्त पहल पर शनिवार, 31 अक्टूबर को दिशा स्थित विजुअल रिहैबिलिटेशन सेंटर में ‘CVI 2026 – फ्रॉम ब्रेन टू विजन’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें सेरेब्रल विजुअल इम्पेयरमेंट (CVI) यानी मस्तिष्क से जुड़ी दृष्टि संबंधी समस्याओं की पहचान, जांच और पुनर्वास के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में वरिष्ठ बाल न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एस. सीतारामन और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. उषा ए. जोहरी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि कई बार बच्चों की आंखें सामान्य होने के बावजूद उन्हें मस्तिष्क के स्तर पर देखी गई चीजों को समझने और पहचानने में परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में केवल सामान्य नेत्र परीक्षण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बच्चे की कार्यात्मक दृष्टि का आकलन करना भी जरूरी है।

इस अवसर पर दिशा फाउंडेशन की निदेशक प्रशासन डॉ. भारती खुंटेटा ने संस्था की ओर से वर्ष 1995 से दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, थेरेपी और पुनर्वास के क्षेत्र में दी जा रही सेवाओं की जानकारी साझा की। वहीं, साइट फर्स्ट फाउंडेशन के ऑप्टोमेट्रिस्ट अभिनव मेहरवाल ने कार्यात्मक दृष्टि जांच और न्यूरो-विजुअल रिहैबिलिटेशन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी के तहत प्रतिभागियों को विजुअल रिहैबिलिटेशन सेंटर का भ्रमण भी करवाया गया। इस दौरान उन्हें CVI से प्रभावित बच्चों के सामने आने वाली चुनौतियों, उनकी जांच की प्रक्रिया और पुनर्वास से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने लाइव क्लिनिकल केस के माध्यम से मस्तिष्क की चोट के बाद दृष्टि संबंधी क्षमताओं का आकलन करने और पुनर्वास की प्रक्रिया को भी समझाया।

कार्यक्रम में न्यूरोलॉजी, बाल रोग, नेत्र चिकित्सा, ऑप्टोमेट्री और थेरेपी क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने संयुक्त चर्चा में भाग लिया। चर्चा के दौरान CVI की शीघ्र पहचान, समय पर रेफरल और विभिन्न चिकित्सा एवं थेरेपी विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके साथ ही साइट फर्स्ट के लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और पुनर्वास के बाद आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी दी।

संगोष्ठी का मुख्य केंद्र बच्चों में मस्तिष्क से जुड़ी दृष्टि संबंधी समस्याओं को समय रहते पहचानने, उनकी कार्यात्मक दृष्टि का सही आकलन करने और विशेषज्ञों के समन्वित प्रयासों से प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करने पर रहा।

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