राजीविका दिवाली मेला 2026 का जयपुर में शुभारंभ, 100 स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद बने आकर्षण
जयपुर के आईजीपीआरएस परिसर में राजीविका दिवाली मेला 2026 शुरू हो गया है। 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाले मेले में 100 स्वयं सहायता समूहों के हस्तशिल्प, हैंडलूम, प्राकृतिक खाद्य उत्पाद और राजस्थानी व्यंजन उपलब्ध हैं।
तस्वीर में इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान के महानिदेशक डॉ. नीरज कुमार पवन और राज्य मिशन निदेशक प्रियंका गोस्वामी जयपुर में आयोजित राजीविका दिवाली मेले के उद्घाटन अवसर पर नजर आ रहे हैं।
जयपुर में बुधवार, 28 अक्टूबर को इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान (आईजीपीआरएस) परिसर में राजीविका दिवाली मेला–2026 का शुभारंभ हुआ। डॉ. नीरज कुमार पवन, महानिदेशक, इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान, जयपुर ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्य मिशन निदेशक, राजीविका, श्रीमती प्रियंका गोस्वामी, परियोजना निदेशक (प्रशासन), श्रीमती प्रीति सिंह और राजीविका के समस्त अधिकारीगण उपस्थित रहे। मेले में ग्रामीण महिलाओं के हुनर से तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों, पारंपरिक खाद्य सामग्री और राजस्थानी व्यंजनों को एक मंच पर उपलब्ध कराया गया है।
28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक आयोजित होने वाला यह आठ दिवसीय मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। यहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की खरीदारी के साथ पारंपरिक शिल्प और स्थानीय खानपान से जुड़ी विविध वस्तुएं देखने को मिल रही हैं।
मेले में हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पाद प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं। कोटा डोरिया, मोडल सिल्क, अजरख प्रिंट्स और पारंपरिक कशीदाकारी से तैयार वस्तुओं के साथ मीनाकारी की वस्तुएं, टेराकोटा आर्टिकल्स और चमड़े के हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। दिवाली की खरीदारी के लिए पहुंचे लोगों को यहां परिधान, सजावटी वस्तुओं और उपहारों के विभिन्न विकल्प मिल रहे हैं। उद्घाटन के पहले दिन लोग अलग-अलग स्टॉल पर उत्पादों को देखते और खरीदारी में रुचि लेते नजर आए।
इस आयोजन में कुल 100 स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें हैंडलूम श्रेणी के 40 समूह, हस्तशिल्प के 40 समूह, प्राकृतिक खाद्य उत्पादों के 10 समूह और लाइव फूड श्रेणी के 10 समूह शामिल हैं। इन समूहों के स्टॉल के माध्यम से ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने प्रदर्शित करने और बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
हस्तनिर्मित वस्तुओं के साथ मेले में पारंपरिक खाद्य उत्पादों की भी व्यवस्था की गई है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार अचार, पापड़ और अन्य प्राकृतिक खाद्य उत्पाद यहां उपलब्ध हैं। वहीं, लाइव फूड श्रेणी में राजस्थानी थाली, दाल-बाटी चूरमा और केर-सांगरी जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इससे आगंतुकों को खरीदारी के साथ राजस्थान के स्थानीय खानपान का अनुभव लेने का अवसर मिल रहा है।
राजीविका दिवाली मेले का प्रमुख उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और उनके उद्यमों को प्रोत्साहित करना है। इस मंच के जरिए महिला उद्यमियों को संभावित ग्राहकों से सीधे जुड़ने, अपने उत्पादों की पहचान बढ़ाने और बिक्री के नए अवसर तलाशने का अवसर मिल रहा है। पारंपरिक कौशल से तैयार वस्तुओं को बाजार तक पहुंचाने की यह पहल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
हैंडलूम, हस्तशिल्प, प्राकृतिक खाद्य उत्पादों और पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों की विविधता के साथ आयोजित यह मेला 4 नवंबर तक जयपुर के इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान परिसर में चलेगा। स्थानीय उत्पादों को दिवाली की खरीदारी से जोड़ने के साथ यह आयोजन ग्रामीण महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन, ग्राहक संपर्क और बाजार विस्तार का अवसर प्रदान कर रहा है।