लालगढ़ स्टेशन यार्ड में रेलवे और एनडीआरएफ द्वारा आपदा प्रबंधन के लिए संयुक्त मॉक ड्रिल का अभ्यास।

बीकानेर मंडल के लालगढ़ स्टेशन यार्ड में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को रेलवे ने आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए संयुक्त मॉक ड्रिल की। अभ्यास के दौरान सूरतगढ़-जयपुर ट्रेन के दो कोच पटरी से उतरने और एक स्लीपर कोच के दूसरे स्लीपर कोच के ऊपर चढ़ने की स्थिति तैयार की गई। इस काल्पनिक दुर्घटना में 38 व्यक्तियों के घायल होने की स्थिति के बीच रेलवे, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), सिविल डिफेंस और अन्य संबंधित एजेंसियों ने राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया। मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने दोपहर 12.15 बजे मॉक ड्रिल को सफल घोषित किया।

उत्तर पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल के संरक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस मॉक ड्रिल में गाड़ी संख्या 19720 (सूरतगढ़-जयपुर) के लालगढ़ स्टेशन यार्ड में प्रवेश के दौरान सुबह 11.11 बजे उसके दो कोच पटरी से उतरने की स्थिति बनाई गई। ट्रेन मैनेजर ने तत्परता दिखाते हुए स्टेशन मास्टर को तत्काल सूचना दी। स्टेशन मास्टर ने कंट्रोल के माध्यम से उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद अधिकारियों ने सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (SPART) और दुर्घटना राहत गाड़ी (ART) को घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए। NDRF और SDRF को भी सूचित किया गया। आदेश मिलते ही राहत एवं बचाव के लिए निर्धारित गाड़ियां लालगढ़ स्टेशन यार्ड के लिए रवाना हुईं।


अधिकारियों ने रेलवे अस्पताल लालगढ़, राजकीय अस्पताल बीकानेर, अग्निशमन विभाग, स्काउट गाइड और सिविल पुलिस बल को भी तत्काल सहयोग के लिए सूचित किया। घटनास्थल पर एक स्लीपर कोच दूसरे स्लीपर कोच के ऊपर चढ़ा हुआ दिखाया गया। इस स्थिति को देखते हुए बचाव दलों, दुर्घटना राहत गाड़ियों और SPART ने तेजी से कार्य शुरू किया।

NDRF की टीम ने सूझबूझ और अत्याधुनिक तकनीकी मशीनों का उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सबसे पहले दुर्घटनास्थल की विशेष चमकीले टैग से घेराबंदी की गई और वहां अनावश्यक रूप से मौजूद लोगों को दूर किया गया। इसके बाद NDRF की टीम ने लाउडस्पीकर के माध्यम से घोषणा की कि टीम सभी फंसे हुए घायलों को बाहर निकाल लेगी। लोगों से धैर्य बनाए रखने और सहयोग करने की अपील भी की गई।

मॉक ड्रिल के दौरान कुल 38 व्यक्तियों के घायल होने की स्थिति के अनुरूप उन्हें बाहर निकालकर उपचार की व्यवस्था की गई। कुछ घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से निजी अस्पतालों और स्थानीय सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया। इस अभ्यास में कुल सात एंबुलेंस पहुंचीं। इनमें रेलवे, राजकीय एवं निजी अस्पतालों के साथ 108 एंबुलेंस सेवा की एंबुलेंस भी शामिल थीं। चिकित्सा विभाग ने घायलों की सूची तैयार की। रेलवे स्टाफ ने यह सुनिश्चित किया कि दुर्घटनाग्रस्त कोचों में कोई घायल व्यक्ति शेष न रहे।

मॉक ड्रिल की पूरी प्रक्रिया पर ड्रोन कैमरे से निगरानी रखी गई और फोटोग्राफी की गई। सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग ने घटनास्थल से लाइव प्रसारण किया, जिसकी निगरानी मंडल कार्यालय और मुख्यालय के डिजास्टर मैनेजमेंट रूम में बैठे अधिकारियों ने की। इस दौरान हेल्पलाइन काउंटर खोले गए और टेलीफोन नंबर जारी किए गए। इन हेल्पलाइन व्यवस्थाओं की जांच भी की गई।

जनसंपर्क विभाग ने मीडिया को दुर्घटना से संबंधित वास्तविक जानकारी उपलब्ध कराई। साथ ही हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए और घायलों के परिजनों से संपर्क एवं समन्वय स्थापित करने के सार्थक प्रयास किए गए।

रेलवे के वाणिज्य, यांत्रिक, इंजीनियरिंग, संरक्षा, चिकित्सा, परिचालन, सिग्नल एवं दूरसंचार तथा कार्मिक विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अभ्यास में सहयोग किया। दोपहर 12.15 बजे मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने इसे मॉक ड्रिल घोषित किया।

इसके बाद मंडल रेल प्रबंधक गौरव गोविल ने मीडिया के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल पूरी तरह सफल रही और रेलवे के सभी संसाधन निर्धारित मानकों के अनुसार तेजी से कार्य कर रहे थे। उन्होंने असिस्टेंट NDRF श्री प्रवीण कुमार, वैभव सुहानी, चीफ रोलिंग स्टॉक, जयपुर (मुख्यालय), सतबीर जाजडा, CMO और उनकी पूरी टीम का धन्यवाद किया। उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार के अभ्यासों में समान सहयोग की आशा जताई। वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी अजय सिंह सेंगर ने भी मॉक एक्सरसाइज में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस मॉक ड्रिल में अपर मंडल रेल प्रबंधक राजेन्द्र सिंह चौधरी सहित मंडल के सभी शाखा अधिकारी और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अभ्यास का उद्देश्य आपदा प्रबंधन के लिए उपलब्ध संसाधनों की कार्यशीलता सुनिश्चित करना और संबंधित टीमों को तैयार रखना था। रेलवे के निर्धारित मानकों के अनुसार सभी व्यवस्थाएं सही पाई गईं और संयुक्त आपदा प्रबंधन अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

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