राजस्थान: विकसित भारत-जन सेवा अभियान के तहत 59,712 मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे
कृषि विभाग ने ग्रामीण शिविरों के जरिए किसानों को मृदा परीक्षण और संतुलित उर्वरक प्रयोग के प्रति जागरूक कर योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाया।
जयपुर, 29 सितम्बर। प्रदेश में चल रहे ‘विकसित भारत–जन सेवा अभियान’ के तहत कृषि विभाग की ओर से किसानों तक योजनाओं और कृषि सेवाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। अभियान के तहत 26 से 28 सितंबर तक गिरदावर सर्किल पर आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों और ब्लॉक लेवल पर 19 से 25 सितम्बर तक आयोजित ‘सेवा सेतु अभियान–ग्रामीण क्षेत्र’ के दौरान किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। साथ ही उन्हें कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी दी गई।
आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश में कुल 59,712 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए, जबकि 4 लाख 64 हजार किसानों को विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी से लाभान्वित किया गया। इससे किसानों को अपनी भूमि की मृदा स्थिति की जानकारी मिलने के साथ कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया की जानकारी भी मिली।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण में सवाई माधोपुर जिले में 6,685, करौली में 5,117, नागौर में 3,532, डीडवाना कुचामन में 2,718 तथा झुंझुनू में 2,522 कार्ड वितरित किए गए।
वहीं विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी से लाभान्वित किसानों की संख्या में सवाई माधोपुर में 40,473, जयपुर में 32,340, जोधपुर में 26,370, भीलवाड़ा में 20,304, सिरोही में 18,371 तथा सीकर में 18118 सहित कई जिलों में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की गई।
अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं, सुविधाओं एवं तकनीकी सेवाओं की जानकारी उनके निकट उपलब्ध कराना है, ताकि पात्र किसान समय पर योजनाओं का लाभ उठा सकें। विभाग की ओर से मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा मृदा परीक्षण के आधार पर संतुलित एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
कृषि विभाग की ओर से ‘विकसित भारत–जन सेवा अभियान’ 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न सेवाओं एवं योजनाओं की जानकारी किसानों तक पहुंचाने का अभियान निरंतर जारी है। इससे किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के साथ कृषि सेवाओं की पहुंच को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल रही है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराने तथा संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के तहत खेत से मिट्टी का नमूना लेकर वैज्ञानिक विधि से उसकी जांच की जाती है। जांच के आधार पर किसान को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी में उपलब्ध प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति के साथ फसल के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों एवं उर्वरकों की मात्रा की सिफारिश दी जाती है। इससे किसान को यह जानने में मदद मिलती है कि उसके खेत में कौन-से पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में हैं और किन तत्वों की कमी है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन, पीएच, विद्युत चालकता तथा ऑर्गेनिक कार्बन सहित 12 मानकों की जांच की जाती है। जांच के आधार पर उर्वरकों, जैव उर्वरकों, जैविक खाद तथा आवश्यक मृदा सुधारकों के उपयोग के संबंध में सलाह दी जाती है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उद्देश्य किसानों को बिना आवश्यकता अधिक मात्रा में उर्वरकों के उपयोग से बचाते हुए मिट्टी की आवश्यकता के अनुरूप पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे अनावश्यक उर्वरक खर्च को कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने तथा दीर्घकाल में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।