जयपुर में 'ऑक्टेव 2026' का आयोजन: पूर्वोत्तर भारत की कला और संस्कृति का दिखेगा संगम
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित 4 दिवसीय महोत्सव में 8 राज्यों के 250 से अधिक कलाकार लोक नृत्य, संगीत और शिल्प का प्रदर्शन करेंगे।
जयपुर में 1 से 4 अक्टूबर तक ‘ऑक्टेव 2026’ के जरिए पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से आयोजित इस चार दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन 1 अक्टूबर की शाम 7 बजे होगा।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि ‘ऑक्टेव’ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय का प्रमुख सांस्कृतिक आयोजन है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना और वहां की विविध परंपराओं से लोगों को रूबरू कराना है। इस बार जयपुर में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा की लोक एवं शास्त्रीय नृत्य परंपराओं, संगीत, पारंपरिक परिधानों, शिल्प, चित्रकला और खानपान यानी संपूर्ण संस्कृति देखने को मिलेगी।
आयोजन में 250 से अधिक लोक कलाकार हिस्सा लेंगे, जिनका कोरियोग्राफ तरुण प्रधान करेंगे। आयोजन का आकर्षक एंबियंस कोलकाता के अनूप गिरी ने डिजाइन किया है। उद्घाटन समारोह में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागडे मुख्य अतिथि होंगे, जबकि केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समारोह की अध्यक्षता करेंगे। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक निहाल चंद गोयल भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।
कार्यक्रम के तहत 2 और 3 अक्टूबर को मणिपुरी रास की प्रस्तुति होगी। 3 और 4 अक्टूबर को असम के शास्त्रीय नृत्य सत्रिया की प्रस्तुति होगी। सिक्किम का सिंघी छम यानी स्नो लायन नृत्य और तमांग सेलो, त्रिपुरा का होजागिरी और ममिता तथा अरुणाचल प्रदेश का जुजु-झा-झा और ताई खामती नृत्य समारोह में पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विविधता के अलग-अलग रंग प्रस्तुत करेंगे।
1 और 2 अक्टूबर को पारंपरिक वेशभूषा प्रदर्शन यानी एथनिक कॉस्ट्यूम शो आयोजित होगा। इसमें पूर्वोत्तर के आठों राज्यों के पारंपरिक परिधान और आभूषण प्रदर्शित किए जाएंगे। 3 अक्टूबर को नागालैंड का समूह गायन प्रस्तुत किया जाएगा। 4 अक्टूबर को समापन समारोह में सत्रिया और विभिन्न लोक नृत्यों के साथ नागालैंड के ‘डिवाइन कनेक्शन’ रॉक बैंड की प्रस्तुति होगी।
1 और 2 अक्टूबर को दो दिवसीय सेमिनार भी आयोजित किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से 12 शिक्षाविद और विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे, जिन्हें पूर्वोत्तर की कलाओं, परंपराओं और संस्कृति का गहन अध्ययन और अनुभव है। सेमिनार के संयोजक सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रो. संतोष कुमार रहेंगे।
1 से 4 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक शिल्प मेला भी लगेगा। पूर्वोत्तर भारत के शाकाहारी व्यंजन आयोजन का विशेष आकर्षण रहेंगे। इससे पूर्व 28 अक्टूबर से सात दिवसीय नॉर्थ-ईस्ट पेंर्टस केम्प का भी आयोजन किया जा रहा है।
डॉ. दलवी ने ऑक्टेव के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि इसका सर्वप्रथम आयोजन नवंबर 2008 में गोवा में हुआ था। इसके बाद नवंबर 2009 में सूरत, गुजरात, नवंबर 2010 में औरंगाबाद, महाराष्ट्र, नवंबर 2011 में मडगांव, गोवा, मार्च 2012 में जोधपुर, राजस्थान, जनवरी 2013 में मुंबई, महाराष्ट्र, जनवरी 2014 में पणजी, गोवा, फरवरी 2015 में वडोदरा, गुजरात, सितंबर 2016 में अजमेर, राजस्थान, नवंबर 2017 में मडगांव, गोवा, दिसंबर 2018 में नागपुर, महाराष्ट्र तथा फरवरी-मार्च 2019 में आणंद, गुजरात में ऑक्टेव का आयोजन हुआ।
वर्ष 2020 में कोविड-19 के कारण ऑक्टेव का आयोजन नहीं हुआ तथा वर्ष 2021 में भी इसका आयोजन नहीं हुआ। इसके बाद मार्च 2022 में मडगांव, गोवा में ऑक्टेव आयोजित हुआ, जबकि वर्ष 2023 में इसका आयोजन नहीं हुआ। मार्च 2024 में सांखली, गोवा तथा अक्टूबर 2025 में नागपुर, महाराष्ट्र में ऑक्टेव का आयोजन किया गया। अब वर्ष 2026 में जयपुर में आयोजित होने वाला ऑक्टेव पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों की कला, संस्कृति, परंपराओं, शिल्प, संगीत, नृत्य और खानपान को एक मंच पर प्रस्तुत करेगा।