राजस्थान में रबी सीजन के लिए पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध, सरकार की अपील
प्रदेश में 3.72 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 1.06 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध, कालाबाजारी पर रोक के लिए 61 चेक पोस्ट स्थापित।
जयपुर, 07 अक्टूबर। रबी सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर किसानों की चिंता के बीच राज्य सरकार ने प्रदेश में पर्याप्त स्टॉक होने की बात कही है। वर्तमान में प्रदेश में 3 लाख 72 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 1 लाख 06 हजार मीट्रिक टन डीएपी, 97 हजार मीट्रिक टन एनपीके तथा 2 लाख 08 हजार मीट्रिक टन एसएसपी का स्टॉक उपलब्ध है। कम उपलब्धता एवं अधिक खपत वाले जिलों और ब्लॉकों को चिन्हित कर मांग के अनुरूप प्राथमिकता से उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
राज्य सरकार एवं कृषि विभाग द्वारा रबी सीजन में किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर नजर रखते हुए मांग एवं खपत के अनुसार जिलों को प्राथमिकता से आपूर्ति की जा रही है। साथ ही कालाबाजारी, जमाखोरी और डायवर्जन के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।
हाल ही में रबी 2026-27 के दौरान किसानों को उनकी मांग अनुरूप गुणवता युक्त उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय 'फर्टीलाईजर डिस्ट्रीब्यूशन रेगुलेट्री टॉस्क फोर्स' की बैठक आयोजित की गई।
कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों को किसी भी प्रकार की अफवाह अथवा बहकावे में आकर अनावश्यक रूप से उर्वरक खरीदने या उसका भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार केन्द्र सरकार के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर प्रदेश की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है।
फसल विविधीकरण के अनुरूप उर्वरकों की व्यवस्था
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा तिलहन एवं दलहन को बढ़ावा देने के दृष्टिगत राज्य में इन फसलों के बुवाई क्षेत्र में वृद्धि प्रस्तावित की गई है, जबकि खाद्यान्न फसलों के क्षेत्रफल में कमी प्रस्तावित है। रबी 2025-26 में 39.82 लाख हैक्टेयर में तिलहनी, 20.69 लाख हैक्टेयर में दलहनी तथा 42.77 लाख हैक्टेयर में अनाज की बुवाई हुई थी।
इसके मुकाबले रबी 2026-27 में 40.06 लाख हैक्टेयर तिलहनी, 21.95 लाख हैक्टेयर दलहनी तथा 38.50 लाख हैक्टेयर अनाज की बुवाई प्रस्तावित की गई है। फसलवार प्रस्तावित क्षेत्रफल एवं उर्वरकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य में उर्वरकों की आपूर्ति एवं वितरण की योजना तैयार की गई है।
केन्द्र सरकार से लगातार समन्वय, अतिरिक्त आपूर्ति की भी तैयारी
कृषि मंत्री ने बताया कि रबी 2026-27 में अक्टूबर माह के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को 4 लाख 60 हजार मीट्रिक टन यूरिया आवंटित किया गया है। 1 अक्टूबर को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 4 लाख 33 हजार मीट्रिक टन यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है।
इसी प्रकार अक्टूबर माह के लिए केंद्र सरकार द्वारा आवंटित डीएपी 2 लाख 400 मीट्रिक टन डीएपी के विरूद्ध 1 अक्टूबर को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 1 लाख 41 हजार मीट्रिक टन की व्यवस्था की जा चुकी है एवं आवंटित मात्रा के अनुरूप राज्य में उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है।
24 एफआईआर दर्ज, 118 लाइसेंस निलंबित या निरस्त
कृषि मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर उर्वरक वितरण में जमाखोरी, कालाबाजारी, यूरिया डायवर्जन एवं अन्य अनियमितताओं के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की गई है। विभाग द्वारा 12 हजार 362 विक्रय परिसरों का सघन निरीक्षण कर 24 एफआईआर दर्ज की गईं। साथ ही 115 उर्वरक लाईसेंस निलम्बित व 3 लाईसेंस निरस्त किए गए।
उर्वरक डायवर्जन के तहत विभिन्न उर्वरको के 1223 बैग जप्त किए गए हैं। गुण नियंत्रण कार्यवाहियों के तहत अब तक यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी, टीडीएम एवं प्रोम के कुल 8 हजार 533 बैग जप्त किए गए हैं। विभिन्न थानों में दर्ज एफआईआर में अब तक 11 व्यक्तियों की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी की जा चुकी है।
वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा 10 सितम्बर से 15 अक्टूबर तक विशेष गुण नियंत्रण अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न प्रावधानों में निरीक्षण जप्ती, नमूना आहरण, उर्वरक डायवर्जन रोकने आदि कार्यवाहियां की जा रही हैं।
मांग के अनुसार पारदर्शी वितरण व्यवस्था
प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा यूरिया, डीएपी एवं अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार एवं कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन तथा जिलों की मांग के आधार पर जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर उर्वरकों का पारदर्शी एवं समान वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष की तुलना में प्रदेश में फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर है। कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिश के अनुसार ही उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कालाबाजारी एवं जमाखोरी पर सरकार की सख्त कार्रवाई
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि उर्वरक वितरण में अनियमितता, जमाखोरी एवं कालाबाजारी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। विभाग द्वारा उर्वरकों के वितरण की लगातार निगरानी की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रदेश में प्रत्येक उर्वरक विक्रेता के विक्रय परिसर पर उर्वरकों के वितरण एवं प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए विभागीय अधिकारियों एवं कार्मिकों की नामजद ड्यूटी लगाई गई है। जिन विक्रेताओं के यहां किसानों की संख्या अधिक है, वहां किसानों को पंक्तिबद्ध कर विभागीय अधिकारियों की निगरानी में उर्वरकों का वितरण करवाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सीमावर्ती जिलों से उर्वरकों के अनाधिकृत रूप से अन्य राज्यों में परिगमन को रोकने के लिए विभागीय कार्मिकों तथा आवश्यकता के अनुसार पुलिस के सहयोग से 61 चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं। इन चेक पोस्टों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रदेश के सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं डायवर्जन पर सतत निगरानी की जा रही है तथा उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं आपूर्ति की स्थिति पर नियमित रूप से नजर रखी जा रही है।
किसानों से अपील-आवश्यकता के अनुसार ही खरीदें उर्वरक
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या बहकावे में आकर पैनिक न हों। प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों की आवश्यकता के अनुसार लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और अनावश्यक रूप से उर्वरकों का भंडारण नहीं करें। राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनकी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों की उपलब्धता एवं आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। किसानों को समय पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार के स्तर पर निरंतर समन्वय एवं निगरानी जारी रहेगी।