राजस्थान पुलिस की कार्यशैली में बदलाव की तैयारी, डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने बताई प्राथमिकता
राजस्थान पुलिस की कार्यशैली में बदलाव के लिए जयपुर की आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू हुआ। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने संवेदनशील व्यवहार, अपराधियों पर सख्ती और आमजन का विश्वास मजबूत करने पर जोर दिया।
जयपुर स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ पर दीप प्रज्वलित करते राजस्थान के डीजीपी राजीव कुमार शर्मा (बाएं), साथ में चेयरमैन अपूर्व कुमार (बीच में) और डॉ. पी.आर. सोढाणी (दाएं)।
राजस्थान पुलिस आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार, प्रभावी संवाद और विश्वास को मजबूत करने के लिए अपनी कार्यशैली में बदलाव की दिशा में कदम उठा रही है। पुलिसकर्मियों को पारदर्शी कार्यप्रणाली अपनाने, व्यवहार कुशल बनाने और नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने के लिए चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार, 15 अक्टूबर को जयपुर स्थित आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी परिसर में ‘पॉजिटिव बिहेवियर इन पुलिसिंग’ तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। राजस्थान के महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। यह प्रशिक्षण 17 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें 35 पुलिसकर्मी विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद कर रहे हैं।
डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राजस्थान पुलिस के आमजन के प्रति संवेदनशील व्यवहार और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की पूरे देश के पुलिस अधिकारियों के बीच चर्चा है। इस सकारात्मक और पेशेवर छवि को बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आमजन अपनी परेशानियां लेकर थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों को उनकी बात संवेदनशीलता से सुननी चाहिए और विधिक प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने का प्रयास करना चाहिए। संवेदनशीलता का अर्थ नरमी बरतना नहीं, बल्कि कानून के दायरे में पीड़ित को राहत दिलाने का प्रयास करना है।
डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि वे आमजन की जगह खुद को रखकर सोचें कि शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर वे पुलिस से किस तरह के व्यवहार की अपेक्षा करेंगे। पुलिसकर्मियों को भी नागरिकों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के प्रति सख्ती और आमजन के प्रति संवेदनशीलता पुलिस की कार्यशैली का मूल आधार होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने थानों की कार्यप्रणाली को नए दृष्टिकोण से देखने, सकारात्मक माहौल बनाने और पुलिस के प्रति आमजन की धारणा में बदलाव लाने का आग्रह किया।
राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी, त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता और लगातार बदलती चुनौतियों के बीच काम करना पड़ता है। ऐसी परिस्थितियों में स्पष्ट संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार और कानून के प्रति प्रतिबद्धता जरूरी है। पारदर्शिता के इस दौर में पुलिस का आचरण हर व्यक्ति की नजर में है। उन्होंने प्रशिक्षण में शामिल पुलिसकर्मियों से अपने अनुभव और सफल उदाहरण साझा करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी डॉ. एम.के. देवराजन ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का मंच भी है। प्रतिभागियों को खुलकर अपने विचार रखने चाहिए। सामूहिक चिंतन से ही आगे बढ़ने का रास्ता निकलेगा। उन्होंने पुलिस सुधार के लिए पूर्व में किए गए प्रयासों की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में उदय पारीक एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन के चेयरमैन अपूर्व कुमार ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पी.आर. सोढाणी ने आभार व्यक्त किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में केस स्टडी, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चा और आत्मचिंतन के माध्यम से पुलिसिंग को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने पर काम किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दूसरे दिन शुक्रवार को ‘दबाव की परिस्थितियों में पुलिसिंग’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें कार्य के दौरान तनाव को समझने, भावनात्मक परिस्थितियों में संयम बनाए रखने, प्राथमिकताएं तय करने और नागरिकों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। कठिन संवाद, नाराज शिकायतकर्ताओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए भूमिका-अभिनय तथा समूह अभ्यास भी कराए जाएंगे।
प्रशिक्षण के तीसरे दिन शनिवार को ‘सीख से सकारात्मक पुलिसिंग की ओर’ विषय के तहत प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को व्यवहार में लागू करने पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें सकारात्मक व्यवहार, प्रभावी संवाद, सक्रिय रूप से सुनने, आपसी संबंध मजबूत करने और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध विकसित करने के व्यावहारिक उपायों पर काम होगा। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों की व्यक्तिगत और इकाई स्तर की कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी। साथ ही, पुलिसकर्मियों को अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से राजस्थान पुलिस की कार्यप्रणाली में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और नागरिकों के साथ विश्वासपूर्ण संवाद को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।