जयपुर, 21 सितम्बर। किसानों को उर्वरक लेने के लिए कतार और अनावश्यक भागदौड़ से राहत देने की दिशा में राज्य सरकार नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। कृषि विभाग ने Farmer Fertilizer System (FFS) के प्रथम चरण से मिले अनुभव और किसानों के फीडबैक के आधार पर उर्वरक बुकिंग एवं वितरण व्यवस्था को सरल बनाने का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया है।

प्रस्तावित व्यवस्था में किसान यूरिया, DAP सहित अन्य उर्वरकों की बुकिंग घर बैठे कर सकेंगे। इसके लिए मोबाइल फोन, मोबाइल ऐप अथवा उर्वरक डीलर के माध्यम से बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। व्यवस्था को घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग की तर्ज पर सरल बनाने के साथ किसान की भूमि, फसल और वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक की उपलब्धता एवं डिलीवरी सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि कृषि विभाग एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम कर रहा है। सहकारिता विभाग के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे किसानों की भूमि, फसल एवं वास्तविक आवश्यकता के आधार पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। भविष्य में उर्वरक किसानों के घर तक पहुंचाने की दिशा में भी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास है।

उन्होंने बताया कि इसका प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। आवश्यक अनुमति प्राप्त होने के बाद इसे लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार ने उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण को अधिक पारदर्शी, सुगम और किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से पायलट आधार पर Farmer Fertilizer System लागू किया था। इसके प्रारंभिक चरण में चयनित जिलों के किसानों को व्यवस्था के उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण एवं आवश्यक जानकारी दी गई।

FFS के माध्यम से किसान स्वयं ऐप डाउनलोड कर अथवा ई-मित्र के माध्यम से घर बैठे उर्वरक की बुकिंग कर सकते थे। किसान को नजदीकी डीलर के पास उपलब्ध उर्वरक की जानकारी मिलती थी। इसके बाद किसान संबंधित डीलर के पास जाकर QR कोड दिखाता था और निर्धारित दर एवं मात्रा के अनुसार उर्वरक प्राप्त करता था।

इस व्यवस्था के तहत कम समय में 8.31 लाख किसानों ने QR कोड जनरेट किए तथा 1.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरक FFS के माध्यम से खरीदा गया। किसान संगठनों एवं FPOs से भी व्यवस्था को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं।

फार्मर फ्रेमवर्क के तहत फर्टिलाइजर सेल का प्रथम चरण काफी सफल रहा है। अब कृषि विभाग फील्ड में किसानों से सीधे संवाद कर रहा है और खाद की बुकिंग एवं प्राप्ति के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं को चिन्हित कर उनके समाधान पर काम किया जा रहा है।

किसानों से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि बुकिंग के दौरान उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्राप्त सुझावों और फीडबैक के आधार पर तकनीकी एवं प्रक्रियागत सुधार किए जा रहे हैं, ताकि किसान बिना परेशानी अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक बुक कर सकें और निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद प्राप्त कर सकें।

कृषि मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था में केवल तकनीकी रूप से सक्षम किसानों तक ही सुविधा सीमित नहीं रखी जाएगी। मोबाइल ऐप अथवा ऑनलाइन प्रक्रिया का प्रत्यक्ष रूप से उपयोग करने में सक्षम नहीं होने वाले किसानों के लिए भी वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नई व्यवस्था में ऑफलाइन खसरा, बटाईदार किसान तथा अन्य विशेष भूमि एवं राजस्व रिकॉर्ड वाली परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। किसानों की ओर से Farmer ID के साथ-साथ आधार/जनाधार आधारित बुकिंग, ऑफलाइन खसरों को शामिल करने तथा बटाईदार किसानों की भूमि को व्यवस्था से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।

विशेष रूप से मंदिर माफी भूमि एवं ऑफलाइन खसरा जैसी परिस्थितियों वाले किसानों को भी उर्वरक सुविधा का लाभ मिल सके, इसके लिए आवश्यक विकल्प विकसित किए जा रहे हैं।

राज्य में 1 सितम्बर से 30 सितम्बर तक Farmer ID बनाने का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से व्यापक स्तर पर किसानों की Farmer ID तैयार की जा रही है। इससे भविष्य में कृषि विभाग की विभिन्न सेवाओं एवं योजनाओं को किसानों तक अधिक सरल, पारदर्शी और लक्षित तरीके से पहुंचाने में मदद मिलेगी।

कृषि मंत्री ने किसानों से उर्वरकों को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रबी सीजन के लिए यूरिया एवं DAP सहित फॉस्फेटिक उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा किसानों को अनावश्यक रूप से अग्रिम भंडारण करने की आवश्यकता नहीं है।

खरीफ 2026 में अप्रैल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा राजस्थान को 9 लाख 28 हजार मीट्रिक टन यूरिया आवंटित किया गया। 1 अप्रैल को उपलब्ध स्टॉक को शामिल करते हुए अब तक प्रदेश में 14 लाख 09 हजार मीट्रिक टन यूरिया, अर्थात आवंटन का लगभग 151 प्रतिशत, उपलब्ध कराया जा चुका है।

इसी प्रकार अप्रैल से अगस्त तक 4 लाख 48 हजार मीट्रिक टन DAP की मांग के मुकाबले 1 अप्रैल के उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 3 लाख 72 हजार मीट्रिक टन DAP उपलब्ध कराया गया है। आयातित DAP की आपूर्ति प्रभावित होने के बावजूद किसानों के लिए वैकल्पिक फॉस्फेटिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।

प्रदेश में अब तक 1 लाख 74 हजार मीट्रिक टन NPK तथा 3 लाख 76 हजार मीट्रिक टन SSP भी उपलब्ध कराया गया है। इस प्रकार किसानों की मांग के अनुरूप कुल 9 लाख 22 हजार मीट्रिक टन फॉस्फेटिक उर्वरक उपलब्ध कराया जा चुका है।

वर्तमान में प्रदेश में लगभग 3 लाख 24 हजार मीट्रिक टन यूरिया, 1 लाख 08 हजार मीट्रिक टन DAP, 95 हजार मीट्रिक टन NPK तथा 2 लाख 15 हजार मीट्रिक टन SSP का स्टॉक उपलब्ध है। उर्वरकों की आपूर्ति लगातार जारी है।

भारत सरकार द्वारा राज्यों को उर्वरकों का माहवार एवं कंपनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन तथा जिलों की वास्तविक मांग के आधार पर जिलावार आपूर्ति योजना तैयार कर उर्वरकों का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि तकनीक और सुविधा का बेहतर समन्वय करते हुए किसानों को समय पर, पर्याप्त मात्रा में और उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।

FFS के अनुभव, फील्ड से प्राप्त किसानों के सुझाव और तकनीकी सुधारों के आधार पर तैयार की जा रही नई व्यवस्था का उद्देश्य उर्वरक बुकिंग एवं वितरण प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, सुगम और किसान हितैषी बनाना है, ताकि किसानों को खाद के लिए अनावश्यक भागदौड़ न करनी पड़े और उनकी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक सहजता से उपलब्ध हो सके।

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