फर्जी फसल बीमा पर राजस्थान सरकार का बड़ा एक्शन, सीएससी संचालक और किसानों पर FIR के आदेश
श्रीगंगानगर के कालूसर में फर्जी फसल बीमा का खुलासा, एक खसरे पर कई पॉलिसियों से 31 लाख रुपये से अधिक का क्लेम सामने आया।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में फर्जी पॉलिसियां बनाकर बीमा क्लेम हासिल करने के मामले में कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ तहसील के कालूसर गांव में सामने आए मामले की विभागीय जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद संबंधित सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और किसानों के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), जिला परिषद श्रीगंगानगर को भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाकर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल की ओर से भी सूरतगढ़ तहसील के संबंधित किसानों, सीएससी (ई-मित्र) संचालकों तथा मामले में संलिप्त पाए जाने वाले अन्य पक्षों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी किए गए हैं।
विभागीय जांच में सामने आया कि कृषक बनवारी लाल ने अपने खसरा नंबर 281/91 की 10.37 हेक्टेयर भूमि पर ऋणी किसान के रूप में मूंगफली का फसल बीमा करवाया। इसी खसरे पर सीएससी (ई-मित्र) संचालक विकास कुमार के माध्यम से भी 10.37 हेक्टेयर तथा बिजेश के माध्यम से 10.30 हेक्टेयर क्षेत्रफल का अलग-अलग बीमा करवाया गया।
जांच के अनुसार, इन तीनों पॉलिसियों के आधार पर बनवारी लाल ने कुल 23,35,319 रुपये का बीमा क्लेम प्राप्त किया।
इसी खसरा भूमि को बनवारी लाल ने रिछपाल पुत्र गिरधारी को बटाई/लीज पर दिया था। रिछपाल ने भी इसी 10.37 हेक्टेयर भूमि पर बटाईदार किसान के रूप में मूंगफली का बीमा करवाया और 7,80,195 रुपये का क्लेम प्राप्त किया। इस प्रकार इन दोनों के माध्यम से प्राप्त क्लेम की कुल राशि 31,15,514 रुपये सामने आई है।
जांच में यह भी सामने आया कि खसरा नंबर 281/91 की वास्तविक भूमि के मुकाबले करीब सात गुना अधिक क्षेत्रफल पर अलग-अलग पॉलिसियां जारी कर फसल बीमा कराया गया। इसी भूमि पर अन्य किसानों द्वारा कराई गई कुछ पॉलिसियां बीमा कंपनी ने रिजेक्ट कर दी थीं। विभाग ने पूरे प्रकरण में पॉलिसियों के चयन, स्वीकृति एवं अस्वीकृति की प्रक्रिया की भी गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता जताई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की गाइडलाइन के अनुसार, एक ही भूमि पर अनेक पॉलिसियां जारी होना और वास्तविक क्षेत्रफल से कई गुना अधिक क्षेत्र में बीमा कराया जाना गंभीर अनियमितता है। प्रथम दृष्टया इस पूरे प्रकरण में सीएससी (ई-मित्र), संबंधित किसानों तथा अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच आवश्यक है।
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ केवल पात्र और वास्तविक किसानों तक पहुंचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना के साथ किसी भी प्रकार का फर्जीवाड़ा या दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि फर्जी पॉलिसी बनाने, गलत तरीके से क्लेम लेने अथवा इस पूरे नेटवर्क में सहयोग करने वाले सीएससी (ई-मित्र) संचालकों, संबंधित किसानों, सक्रिय दलालों, बीमा कंपनी के कर्मचारियों तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि ईमानदार और पात्र किसानों के हितों की रक्षा के लिए विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा सरकारी सहायता का दुरुपयोग रोकने के लिए ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी। फर्जी फसल बीमा के इस प्रकरण में एफआईआर के निर्देश के साथ संबंधित किसानों, सीएससी (ई-मित्र) संचालकों और अन्य संभावित संलिप्त पक्षों पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।