जय क्लब में दुर्गा पूजा महोत्सव: मां की आराधना, भोग प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
जयपुर के जय क्लब लॉन में पीबीसीएस के दुर्गा पूजा महोत्सव में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, भोग प्रसाद वितरण और महिलाओं की म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता आयोजित हुई। शाम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में अनुषा घोष, महुआ ग्रुप और पीबीसीएस के कलाकारों ने भाग लिया।
जयपुर के सी-स्कीम स्थित जय क्लब लॉन में प्रोबासी बेंगाली कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुति देती बच्ची।
जयपुर के सी-स्कीम स्थित जय क्लब लॉन में प्रोबासी बेंगाली कल्चरल सोसायटी (पीबीसीएस) की ओर से आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों ने मां के दर्शन किए और भोग प्रसाद ग्रहण किया।
पूजा के दौरान मां दुर्गा को भोग अर्पित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच भोग प्रसाद वितरित किया गया। भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मां का आशीर्वाद लिया। पूरे दिन पूजा पंडाल में धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं और भक्तिमय माहौल बना रहा।
धार्मिक आयोजनों के साथ महिलाओं के लिए म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों का उत्साह देखने को मिला और उपस्थित लोगों ने तालियां बजाकर उनका हौसला बढ़ाया।
शाम को संध्या आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। अनुषा घोष ने बांग्ला नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। इसके बाद महुआ ग्रुप, कोलकाता की ओर से नृत्य प्रस्तुति दी गई। पीबीसीएस के कलाकारों ने भी बंगाली और हिंदी गीतों का मधुर कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बंगाली संस्कृति, लोक परंपराओं और कलात्मक विरासत की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से मां दुर्गा की महिमा, बंगाली लोकजीवन और पारंपरिक उत्सवों की रंगारंग छटा पेश की।
प्रोबासी बेंगाली कल्चरल सोसायटी की ओर से दुर्गा पूजा महोत्सव के माध्यम से धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी महत्व दिया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य समाज के लोगों को एक मंच पर लाना और नई पीढ़ी को बंगाली संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ना है।