तस्वीर में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे नीमराना स्थित रैफल्स यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव-2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे हैं।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने युवाओं से भारतीय ज्ञान परंपरा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए देश की बौद्धिक परंपराओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने ज्ञान और कौशल का विकास करने के साथ राष्ट्र के विकास तथा साहित्य और संस्कृति को समृद्ध बनाने में भी योगदान देना चाहिए। भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और साहित्यिक विरासत विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे मंगलवार, 27 अक्टूबर को नीमराना स्थित रैफल्स यूनिवर्सिटी में आयोजित तीन दिवसीय ‘वर्ड्स बियॉन्ड बॉर्डर्स’ (डब्ल्यूबीबी) अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव-2026 के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान-विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां की बौद्धिक परंपराओं ने विश्व को दिशा देने का कार्य किया है।

भारतीय गणितीय ज्ञान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शून्य और दशमलव पद्धति भारत की महत्वपूर्ण देन हैं। भारतीय प्राचीन ग्रंथों, वेदों और उपनिषदों में निहित ज्ञान आज भी प्रासंगिक है। भारत की ज्ञान परंपरा और साहित्य का प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर विश्व के अनेक देशों तक पहुंचा है। उन्होंने भारतीय साहित्य की वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए रवीन्द्रनाथ टैगोर की साहित्यिक कृतियों और जर्मन भाषाविद् एवं साहित्यकार मैक्स मूलर की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। मैक्स मूलर ने भारतीय साहित्य का अनुवाद कर भारतीय ज्ञान को विश्व तक पहुंचाने में योगदान दिया।

राज्यपाल ने राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश वीरता की भूमि होने के साथ-साथ साहित्य, कला और संस्कृति की भी समृद्ध धरोहर है। यहां के किले, महल और ऐतिहासिक इमारतें केवल स्थापत्य कला के उदाहरण नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना और गौरवशाली इतिहास की जीवंत अभिव्यक्ति भी हैं।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के विश्वविद्यालयों में विदेशों से विद्यार्थी ज्ञान अर्जित करने आते थे। यह देश की समृद्ध शैक्षणिक और बौद्धिक परंपरा का प्रमाण है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति, शक्ति और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। ऐसे में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहकर ज्ञान के नए आयाम विकसित करने चाहिए और देश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सराहना करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यह नीति भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल संवर्धन तथा रचनात्मक और तार्किक चिंतन को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में मौलिक चिंतन, मानवीय संवेदना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

डॉ. ध्यानेश्वर मुले, एमओपी, फाउंडेशन फॉर आर्ट एंड लिटरेचर (फोकल) तथा रैफल्स यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव में दुनियाभर के लगभग 73 वक्ताओं ने भाग लिया। महोत्सव के दौरान आयोजित 35 सत्रों में साहित्य, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार व्यक्त किए गए।

महोत्सव ने साहित्यिक संवाद, वैचारिक आदान-प्रदान और विभिन्न देशों की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को साझा करने के लिए मंच प्रदान किया। समापन समारोह में राज्यपाल का संबोधन भारतीय ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और शिक्षा में भारतीय मूल्यों की भूमिका को रेखांकित करने के साथ युवाओं की राष्ट्र निर्माण तथा साहित्य और संस्कृति के संवर्धन में भागीदारी पर केंद्रित रहा।

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