राजस्थान में नर्मदा के अतिरिक्त जल भंडारण की तैयारी, सीएम भजनलाल ने दी जानकारी
नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठक में सीएम भजनलाल शर्मा ने मानसून के अधिशेष पानी के उपयोग और ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई मॉडल पर अपनी प्रतिबद्धता जताई।
जयपुर, 27 अक्टूबर। नर्मदा जल के बेहतर उपयोग और अंतरराज्यीय सहयोग से राजस्थान के जलाभावग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल एवं सिंचाई की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रयास तेज किए हैं। मंगलवार को केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल की अध्यक्षता में नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण समीक्षा समिति की 15वीं बैठक आयोजित हुई। इसमें मानसून के दौरान उपलब्ध अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण, जल समझौतों के प्रभावी क्रियान्वयन और जल प्रबंधन से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल सहित वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में वर्षों से लंबित अंतरराज्यीय जल सहयोग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हुए हैं। नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की ओर से 7 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में हुए समझौते को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आपसी सहमति, समन्वय, सहयोग और विश्वास के आधार पर दशकों से लंबित जल समझौतों ने मूर्त रूप लिया है। अंतरराज्यीय सहयोग की यह प्रक्रिया जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और उपलब्ध जल के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण है।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार 1979 के नर्मदा जल विवाद अधिकरण के अंतर्गत मानसून अवधि में उपलब्ध अधिशेष जल का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। अधिशेष जल के भंडारण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मानसून के दौरान व्यर्थ बहने वाले अतिरिक्त पानी को संरक्षित करना है, ताकि प्रदेश के जलाभावग्रस्त क्षेत्रों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। नर्मदा जल का बेहतर उपयोग पेयजल और सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के साथ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक होगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में केन्द्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के साथ बेहतर समन्वय से अंतरराज्यीय जल सहयोग के नए आयाम स्थापित हुए हैं। रामजल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते जैसे ऐतिहासिक समझौतों ने जलाभावग्रस्त क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद जगाई है। वहीं, राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र ने सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप नर्मदा परियोजना के अंतर्गत सराहनीय कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने नर्मदा नहर परियोजना को जल दक्षता का अनूठा मॉडल बताते हुए कहा कि राजस्थान ने इसके अंतर्गत पानी के कुशल उपयोग की मिसाल पेश की है। जालोर और बाड़मेर जिलों के दूरस्थ क्षेत्रों तक लाभ पहुंचाने के लिए परियोजना के सम्पूर्ण कमांड क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई पद्धति को अनिवार्य करने की पहल की गई है।
उन्होंने कहा कि इस सूक्ष्म सिंचाई तकनीक से पानी की छीजत नगण्य हुई है। इसके साथ ही 2.46 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य कमांड क्षेत्र में निर्धारित 40 प्रतिशत सिंचाई सघनता के लक्ष्य को कुशलतापूर्वक प्राप्त किया जा रहा है। इससे किसानों की फसलों की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। यह पहल पूरे देश के लिए जल संरक्षण और जल के कुशल उपयोग की उत्कृष्ट मिसाल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल प्रबंधन केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव है। राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि विकास, अर्थव्यवस्था, कृषि, पशुपालन और जनजीवन की जीवनरेखा है। विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की सुनिश्चित उपलब्धता राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नर्मदा जल प्रबंधन और अंतरराज्यीय सहयोग के प्रयासों में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल तथा गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारों का आभार व्यक्त किया। अधिशेष नर्मदा जल के भंडारण के लिए तैयार की जा रही परियोजना रिपोर्ट और जल दक्षता पर आधारित नर्मदा नहर परियोजना राजस्थान के जलाभावग्रस्त क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।