मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुप्त वृन्दावन धाम में किया राधा-श्यामसुंदर विग्रहों का शिला पूजन
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में राधा-श्यामसुंदर विग्रहों के लिए विशेष शिलाओं का पूजन किया।
तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गुप्त वृन्दावन धाम, जगतपुरा में विशेष शिलाओं का पूजन करते दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को जगतपुरा स्थित गुप्त वृन्दावन धाम में श्री श्री राधा-श्यामसुंदर जी के विग्रह निर्माण के लिए चयनित विशेष शिलाओं का वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया। मंदिर के अध्यक्ष श्री अमितासना दास ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। शिला पूजन के बाद मुख्यमंत्री ने भगवान श्री श्री कृष्ण-बलराम जी के दर्शन किए और महाआरती में भाग लिया।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा, “गुप्त वृन्दावन धाम राजस्थान की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।”
श्री राधारानी के विग्रह के लिए मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले महीन दानेदार श्वेत संगमरमर का चयन किया गया है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण के विग्रह के लिए पावटा के निकट भैंसलाना की प्राचीन खदानों से प्राप्त विशेष कृष्णवर्णीय पत्थर चुना गया है। इन विशिष्ट शिलाओं की खोज पांडे मूर्ति भंडार द्वारा पिछले लगभग 7–8 वर्षों से की जा रही थी।
उपयुक्त गुणवत्ता की शिलाएँ मिलने के बाद इन्हें गुप्त वृन्दावन धाम में श्री श्री राधा-श्यामसुंदर जी के विग्रह निर्माण के लिए सुरक्षित रखा गया था। अब शिला पूजन के साथ विग्रह निर्माण की प्रक्रिया का शुभारंभ किया जा रहा है।
हरे कृष्ण मूवमेंट, जयपुर द्वारा लगभग 6 एकड़ भूमि पर गुप्त वृन्दावन धाम का निर्माण किया जा रहा है। मंदिर का उद्घाटन अगले वर्ष 12 मई 2027, अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर प्रस्तावित है। यह केंद्र सनातन संस्कृति, वैदिक ज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है।
17 मंजिला गुप्त वृन्दावन धाम की प्रमुख विशेषताओं में 180 फीट लंबी और 108 फीट चौड़ी विशाल कमान छतरी शामिल है। इस पर रात्रि में अत्याधुनिक प्रोजेक्शन मैपिंग के माध्यम से भगवान की दिव्य लीलाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। मंदिर का लगभग 70 फीट ऊँचा मुख्य प्रवेश द्वार राजस्थानी स्थापत्य और शिल्पकला से प्रेरित होगा, जिसमें 108 मयूरों का कलात्मक स्वरूप देखने को मिलेगा।
गुप्त वृन्दावन धाम में लगभग 25 हजार वर्गफीट का विशाल दर्शन हॉल, 14 प्रेजेंटेशन रूम, ऑडियो-विजुअल थिएटर और वैदिक म्यूजियम विकसित किए जाएंगे। परिसर में अध्यात्म, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का संगम देखने को मिलेगा। यह केंद्र ‘ग्रीन बिल्डिंग’ कॉन्सेप्ट पर आधारित होगा, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और हरियाली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
गुप्त वृन्दावन धाम के माध्यम से जयपुर और राजस्थान के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नया आयाम मिलने की उम्मीद है। भारत सहित विश्वभर से आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ भारतीय आध्यात्मिक-सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करने के साथ भगवद्गीता, वैदिक संस्कृति, हरिनाम संकीर्तन और कृष्ण-भक्ति से जुड़ सकेंगे।
इस प्रकार शिला पूजन के साथ गुप्त वृन्दावन धाम में श्री श्री राधा-श्यामसुंदर जी के विग्रह निर्माण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है, जबकि 12 मई 2027 को अक्षय तृतीया के अवसर पर प्रस्तावित उद्घाटन के साथ यह केंद्र आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैदिक ज्ञान से जुड़ा प्रमुख परिसर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।