तस्वीर में गुप्त वृन्दावन धाम में पुजारी श्रील प्रभुपाद की प्रतिमा का महा अभिषेक कर रहे हैं।

जन्माष्टमी के अगले दिन गुप्त वृन्दावन धाम में नंदोत्सव और विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद का 130वाँ दिव्य आविर्भाव दिवस (व्यास-पूजा महोत्सव) श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन और भक्तिमय उल्लास से गुंजायमान रहा।

नंदोत्सव में युवा भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष भजन-कीर्तन और नृत्य प्रस्तुत किए गए। भक्तों ने अपनी प्रार्थनाएं अर्पित कीं तथा भगवान के लिए विशेष भोग और पुष्पाभिषेक किया। इस अवसर पर श्री श्री कृष्ण-बलराम का विशेष श्रृंगार किया गया। झूलन उत्सव में भक्तों ने लड्डू गोपाल को झूला झुलाया और पारंपरिक माखन-मिश्री प्रसाद वितरित किया गया।

सायंकाल में व्यास-पूजा का आयोजन हुआ। इसमें विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद का महा अभिषेक किया गया। हज़ारों भक्तों ने उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपनी व्यास-पूजा श्रद्धांजलियां और प्रार्थनाएं अर्पित कीं। विशेष तौर पर विश्व के विभिन्न देशों एवं भाषाओं के भक्तों द्वारा लिखी गई व्यास-पूजा अर्पण-पुस्तिका भी विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद को समर्पित की गई।

भक्तों द्वारा प्रेमपूर्वक तैयार किए गए 1,008 विशेष भोग श्रील प्रभुपाद को अर्पित किए गए। इसके पश्चात भव्य पालकी यात्रा, महा-अभिषेक, हरिनाम संकीर्तन, गुरु-पूजा और महा-आरती का आयोजन हुआ। नंदोत्सव से लेकर व्यास-पूजा तक मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक आयोजनों और संकीर्तन का क्रम बना रहा।

गुप्त वृन्दावन धाम में आयोजित नंदोत्सव और श्रील प्रभुपाद व्यास-पूजा महोत्सव में युवा भक्तों की सहभागिता से लेकर हज़ारों भक्तों की श्रद्धांजलियों तक विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। पूरे दिन चले हरिनाम संकीर्तन और भक्तिमय कार्यक्रमों के साथ महोत्सव का समापन हुआ।

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