जयपुर में बिंईग सिंधी फाउंडेशन ने बुजुर्गों का किया सम्मान
भारत विभाजन का दर्द साझा करते हुए 1947 से पूर्व जन्मे 125 बुजुर्गों को शॉल, माला और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया।
जयपुर में बिंईग सिंधी फाउंडेशन द्वारा बुजुर्गों के लिए आयोजित सम्मान समारोह के दृश्य।
जयपुर में बिंईग सिंधी फाउंडेशन एसपीएल की ओर से बुजुर्गों के सम्मान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जयपुर महानगर के सन 1947 से पूर्व जन्मे 125 बुजुर्गों को शॉल, माला और 1100 रुपये की लिफाफा राशि देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान बुजुर्गों ने भारत विभाजन से जुड़ी अपनी जीवनगाथा साझा की और कहानियों, कविताओं तथा सिंधी गीतों के माध्यम से अपने विचार व्यक्त किए।
बिंईग सिंधी फाउंडेशन की महासचिव श्रीमती प्रिया ज्ञानानी ने बताया कि संस्था के अध्यक्ष श्री सुनील पारवानी द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी बुजुर्ग काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए भारत विभाजन के समय की अपनी दास्तान सुनाई। बुजुर्गों ने कहानी, कविता और सिंधी गीत प्रस्तुत कर अपने विचार प्रकट किए।
कार्यक्रम के दौरान सभी बुजुर्गों ने मिलकर चाय-नाश्ता किया और एसपीएल का केक भी काटा। सभी ने उत्साहपूर्वक एक-दूसरे के साथ अपने विचार साझा किए और आपसी मेल-मिलाप के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
महासचिव प्रिया ज्ञानानी ने बताया कि बिंईग सिंधी फाउंडेशन वर्षभर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। इनमें क्रिकेट लीग, सिंधी टैलेंट हंट, सिंधी गीत-संगीत, विद्यार्थी सम्मान समारोह, वस्त्र वितरण, पक्षियों के लिए घोंसला वितरण, बुजुर्गों का सम्मान और होली मिलन सहित अनेक कार्यक्रम शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि संस्था के सभी पदाधिकारी और सदस्य मिलकर कार्यक्रमों को सफल बनाते हैं। इस आयोजन में ओमी मोटवानी की विशेष भूमिका रहती है।
कार्यक्रम में गोविंद रामनानी, हितेश आडवानी, महेश कृष्णनानी, समाजसेवी दौलत त्रिलोकानी, पुरसोतम गुलवानी, प्रदीप मोटवानी, रमेश हरदयालानी, सुनील कृपलानी और दीपक टहलानी सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। मातृशक्ति की ओर से भूमि कृपलानी, मीना मूलचंदानी, ज्योति छतवानी, चंद्रा रोहड़ा, पायल रामचंदानी, शारदा बालानी, अनीता गोलानी, मुस्कान जोतवानी और चन्द्रा अरोड़ा सहित सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई और कार्यक्रम को सफल बनाया।
बिंईग सिंधी फाउंडेशन एसपीएल का यह आयोजन बुजुर्गों के सम्मान, उनके जीवनानुभवों को साझा करने और समाज के सदस्यों के बीच आपसी जुड़ाव को प्रोत्साहित करने का अवसर बना।