भारत का अक्षय ऊर्जा उत्पादन 300 गीगावाट के पार, जयपुर से शुरू हुआ बीआरई समिट रोडशो
भारत की गैर-जीवाश्म क्षमता 300.50 गीगावाट पहुंची। जयपुर से बीआरई समिट 2026 का पहला रोडशो शुरू हुआ, अब देशभर में निवेश संवाद होगा।
तस्वीर में जयपुर में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 के पहले क्षेत्रीय रोडशो में मंच पर मौजूद वक्ता और प्रतिनिधि नजर आ रहे हैं।
जयपुर में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के देशव्यापी रोडशो अभियान की शुरुआत हुई। भारत मंडपम, नई दिल्ली में 2 से 5 नवंबर 2026 तक होने वाले बीआरई समिट से पहले आयोजित इस पहले क्षेत्रीय रोडशो में सरकार, उद्योग और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख भागीदार एक मंच पर जुटे। भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए जयपुर का यह आयोजन बड़े पैमाने पर वैश्विक गठबंधन की नींव रखने वाला पहला क्षेत्रीय संवाद बना।
स्वच्छ ऊर्जा क्रियान्वयन में अग्रणी राज्यों में शामिल राजस्थान विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों के जरिए भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं के लिए एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है। नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय की ओर से आयोजित रोडशो में राजस्थान सरकार, राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम लिमिटेड (आरआरईसीएल), इंडियन विंड टरबाइन मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडब्लूटीएमए), विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (डब्लूआईपीपीए) और सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स डेवलपर्स एसोसिएशन (एसपीडीए) के प्रतिनिधि शामिल हुए।
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के साथ इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आईएसए) असेंबली और चौथी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ग्रीन हाइड्रोजन (आईसीजीएच) का भी आयोजन होगा। इसमें वैश्विक नेता, नीति निर्माता, उद्योग, निवेशक और नवप्रवर्तक एक साझा मंच पर आएंगे।
उद्घाटन संबोधन में आरआरईसीएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक श्री रोहित गुप्ता ने स्वच्छ ऊर्जा को गति देने के लिए राजस्थान की रणनीतिक रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने कहा कि राजस्थान पारंपरिक सौर प्रणाली से आगे बढ़कर विंड सोलर, हाइब्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते हरित ईंधनों के लिए अनुकूल निवेश माहौल तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
स्वागत भाषण में आईडब्लूटीएमए के सचिव श्री दिनेश जगदले ने भारत आरई समिट के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समिट को केंद्र और राज्य सरकारों, निवेशकों, वित्त प्रदाताओं, टेक्नोलॉजी पार्टनर्स और उद्योग संगठनों के बीच व्यवस्थित संवाद के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि भारत में अक्षय ऊर्जा के अगले चरण का निर्माण वैश्विक साझीदारी के आधार पर किया जा सके।
डब्लूआईपीपीए के कोषाध्यक्ष एवं यनारा के सीईओ श्री नवीन खंडेलवाल ने कहा, “इस पहले रोडशो के मेजबान के तौर पर डब्लूआईपीपीए इस महत्वपूर्ण आयोजन पूर्व संवाद का स्वागत करता है। पवन ऊर्जा, दिन के समय होने वाले सौर ऊर्जा उत्पादन का पूरक है और यह चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति बनाए रखने में मदद करती है। भारत में बीआरई समिट का आयोजन करना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए हम राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इन्हें आवश्यक व्यावसायिक स्थितियों से जोड़ते हैं।”
नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मंच के माध्यम से देश की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक बड़े कीर्तिमान की घोषणा की। भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के मामले में आधिकारिक तौर पर 300 गीगावाट की सीमा पार कर ली है। 31 जुलाई, 2026 तक दर्ज 300.50 गीगावाट क्षमता के साथ भारत के कुल बिजली उत्पादन में इसका योगदान 54 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया है। इस उपलब्धि के साथ 2030 के लिए निर्धारित 500 गीगावाट लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक हासिल किया जा चुका है।
नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राजेश कुलहरि ने कहा, “भारत का स्वच्छ ऊर्जा की ओर रुख एक साझा राष्ट्रीय मिशन है जो राजस्थान जैसे संसाधन संपन्न राज्यों के नेतृत्व से आगे बढ़ रहा है। हमारी गैर-जीवाष्म ईंधन क्षमता के 300 गीगावाट का आंकड़ा पार कर लेने के बाद इस तरह के क्षेत्रीय रोडशो, राज्यों की क्षमताओं को राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 पूरी मूल्य श्रृंखला को एक ही छत के नीचे लाएगा। यह नीतिगत उद्देश्य को बैंकेबल परियोजनाओं में तब्दील करने, सीमा पार निवेश और प्रौद्योगिकी साझीदारी के लिए एक विश्वस्तरीय प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा।”
उद्योग के साथ सहयोग मजबूत करने के उद्देश्य से जयपुर रोडशो में व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों की भागीदारी बढ़ाना और बीआरईएसई 2026 की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम में दो विशेष फिल्में, भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा और बीआरई समिट एंड एक्सपो 2026, प्रदर्शित की गईं। इनमें स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत के सफर और नई दिल्ली में होने वाले समिट की व्यापक झलक दिखाई गई।
नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के वैज्ञानिक श्री पी.के. दास ने रणनीतिक उद्देश्यों, प्रमुख विषयों और वैश्विक एवं घरेलू कंपनियों के लिए प्रस्तावित भागीदारी रूपरेखा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इसके बाद मूल उपकरण विनिर्माताओं, प्रोजेक्ट डेवलपर्स और निवेशकों के लिए व्यवसाय के अवसरों तथा कॉमर्शियल इंगेजमेंट मॉडलों पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। साथ ही आधिकारिक बीआरईएसई डिजिटल पोर्टल एवं मोबाइल एप्लीकेशन का लाइव वॉकथ्रू और प्रदर्शन किया गया।
सत्र के समापन पर एसपीडीए के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य श्री रवि वर्मा ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने इस समिट के सहयोगात्मक विजन को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग की प्रतिबद्धता रेखांकित की और धन्यवाद ज्ञापित किया।
जयपुर में आयोजित यह कार्यक्रम क्षेत्रीय स्तर पर गतिशीलता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किए गए देशव्यापी आउटरीच अभियान की शुरुआत का प्रतीक है। आगामी सप्ताहों में मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद, लखनऊ, बेंगलुरु और कोलकाता में रोडशो प्रस्तावित हैं। मंत्रालय और आयोजक साझीदारों ने सभी राज्य सरकारों, जन उपयोगी सेवाएं देने वाली कंपनियों और उद्योग भागीदारों को इन आगामी क्षेत्रीय सत्रों में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है।
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो (बीआरईएसई) 2026 को विश्व की सबसे बड़ी अक्षय ऊर्जा प्रदर्शनी के रूप में नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के अग्रणी वैश्विक मंच के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। “इनवेस्ट, इन्नोवेट, इंस्पायर” थीम से प्रेरित यह समिट स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में गठबंधन और निवेश को गति देने के लिए 2 से 5 नवंबर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होगा। इसमें सरकारें, नीति निर्माता, उद्योगपति, निवेशक, नवप्रवर्तक, अनुसंधानकर्ता, बहुपक्षीय संगठन और अंतरराष्ट्रीय संस्थान वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा को गति देने के लिए एक साथ आएंगे।
री-इनवेस्ट की विरासत को आगे बढ़ाते हुए बीआरईएसई 2026 अपने दायरे को निवेश से आगे बढ़ाकर नीति, तकनीक, विनिर्माण, नवप्रवर्तन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक साझीदारी तक विस्तारित करता है। यह आयोजन इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आईएसए) असेंबली के नौवें सत्र और चौथी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन ग्रीन हाइड्रोजन (आईसीजीएच) के साथ आयोजित किया जाएगा। इसमें अक्षय ऊर्जा, वैश्विक सौर ऊर्जा सहयोग और उभरते ग्रीन हाइड्रोजन पारितंत्र में भारत के नेतृत्व को उजागर किया जाएगा।
समिट में 20 से अधिक राज्य सरकारों और 250 से अधिक उच्च स्तरीय प्रतिनिधियों सहित 75 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में 80 से अधिक विशेष रूप से तैयार सत्र होंगे, जिनमें 500 से अधिक वक्ता शामिल होंगे। इसके साथ ग्रीन हाइड्रोजन नेटवर्किंग, अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा सहयोग और 400 से अधिक प्रदर्शकों एवं 25 से अधिक नॉलेज पार्टनर्स के साथ भव्य प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।