बाड़मेर: मासूम से दुष्कर्म मामले में पुलिस की मिसाल, 2 घंटे में गिरफ्तारी और 14 दिन में चालान
बाड़मेर में 8 साल की मासूम से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने पेश की मिसाल, 2 घंटे में आरोपी गिरफ्तार और 14 दिन में दाखिल हुआ चालान, जानें पूरी कार्रवाई।
राजस्थान के बाड़मेर जिले में 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के जघन्य मामले में पुलिस ने त्वरित न्याय की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। बाड़मेर जिला पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वारदात के महज 2 घंटे के भीतर आरोपी को दबोच लिया और अब मात्र 14 दिनों की रिकॉर्ड अवधि में संपूर्ण साक्ष्य जुटाकर न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र पेश कर एक मिसाल कायम की है। पुलिस की इस प्रभावी और पेशेवर कार्रवाई से कानून के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हुआ है।
बाड़मेर जिला पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने मामले का विवरण साझा करते हुए बताया कि यह हृदयविदारक घटना 19 जुलाई 2026 को घटित हुई थी। दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच अपने घर के बाहर खेल रही 8 वर्षीय मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर आरोपी ने दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। पीड़िता के परिजनों द्वारा महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आया। प्रकरण की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए एसपी जाट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, महिला अपराध एवं अनुसंधान सेल, नितेश आर्य के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीमों का गठन कर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।
पुलिस मुख्यालय द्वारा गठित टीमों ने असाधारण सक्रियता दिखाते हुए वारदात के मात्र 2 घंटे के भीतर ही मुख्य आरोपी मगसिंह को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की। अनुसंधान अधिकारी एएसपी नितेश आर्य के नेतृत्व में पुलिस टीम ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का बारीकी से संकलन किया। पुलिस ने बिना समय गंवाए जांच प्रक्रिया को तीव्र गति से पूरा किया और घटना के 14वें दिन आरोपी के विरुद्ध माननीय न्यायालय में चालान पेश कर दिया।
पुलिस मुख्यालय के कड़े निर्देशों के अनुपालन में इस जघन्य अपराध को 'केस ऑफिसर स्कीम' के अंतर्गत लिया गया है। प्रकरण में प्रभावी और मजबूत पैरवी सुनिश्चित करने के लिए महिला थानाधिकारी को केस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। नियुक्त केस ऑफिसर का मुख्य दायित्व अदालत में मामले की प्रतिदिन पैरवी सुनिश्चित करना होगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए और आरोपी को यथाशीघ्र कठोरतम सजा दिलाई जा सके। बाड़मेर पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है, बल्कि ऐसे संवेदनशील मामलों में न्याय की गति को तेज करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।