अश्विनी वैष्णव का कांग्रेस पर हमला: EVM और मतदाता सूची पर पूछे 6 सवाल
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जयपुर में कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं पर प्रहार का आरोप लगाया और मतदाता सूची की शुद्धता पर संसद में बहस की चुनौती दी।
जयपुर में आयोजित राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी का झंडा थामे हुए।
जयपुर, 5 नवंबर 2026। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर लगातार प्रहार कर देश में अराजकता फैलाना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस के सामने छह सवाल रखकर पूछा कि क्या वह वास्तव में संविधान में विश्वास करती है और क्या मतदाता सूची में गैर-नागरिकों, मृत व्यक्तियों तथा एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को बनाए रखना चाहती है। वैष्णव ने दावा किया कि कांग्रेस के पास एसआईआर पर चर्चा के लिए न तो सच है और न ही कोई ठोस मुद्दा, इसलिए वह संसद में चर्चा के दौरान वॉकआउट करेगी।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि संवैधानिक संस्थानों को वर्षों की मेहनत, कानूनों, संसद और भारत के 140 करोड़ देशवासियों के श्रम से मजबूत बनाया गया है। इन संस्थानों पर कांग्रेस का लगातार प्रहार करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को ऐसा करने में न कोई शर्म है और न ही झिझक। विभिन्न विषयों को उठाने के उसके तरीके से लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए ने इस विषय को जनता के सामने ले जाने तथा कांग्रेस के इस षड्यंत्र को समाप्त करने का निर्णय किया है।
वैष्णव ने कहा कि लोकतंत्र का सबसे बुनियादी सिद्धांत सही मतदाता सूची है। इसी के आधार पर चुनाव होते हैं, नागरिक अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ती हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) भारतीय संविधान के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया है। यह पहली बार नहीं हो रहा है, बल्कि 1947 के बाद से कई बार संपन्न हो चुका है। ऐसे में कांग्रेस को आज इस प्रक्रिया पर सवाल उठाने का क्या औचित्य है?
ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए रेल मंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) कांग्रेस की सरकार लेकर आई थी। भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में चुनावी व्यवस्था को मजबूत बनाने में ईवीएम की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि ईवीएम से पहले चुनाव किस तरह होते थे, यह किसी से छिपा नहीं है। उस समय नहीं पड़े मतों पर भी पर्चियों में ठप्पे लगा दिए जाते थे, पूरी-पूरी मतपेटियां भर दी जाती थीं और बूथ लूटने जैसी घटनाएं होती थीं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों, विशेषकर कम्युनिस्टों के शासनकाल में ऐसी घटनाएं बार-बार सामने आती थीं। ईवीएम लागू होने के बाद इन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिली। उन्होंने सवाल किया कि अब कांग्रेस किस आधार पर इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है?
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की कांग्रेस की मांग पर भी वैष्णव ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर के आधार पर चुनाव कराकर भी देख लिया गया है। कांग्रेस की मांग पर एमएलसी के चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। इसके बावजूद यदि कांग्रेस सीटें नहीं जीत पाई, तो क्या वह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग वापस लेगी?
मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर रेल मंत्री ने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह चाहती है कि भारत के नागरिक नहीं होने वाले लोगों को भी मतदान का अधिकार मिले? क्या कांग्रेस चाहती है कि जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनके नाम मतदाता सूची में बने रहें? क्या एक ही व्यक्ति का एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज रहने वाली व्यवस्था का कांग्रेस समर्थन करती है?
संविधान के मुद्दे पर वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस के नेता जिस संविधान की किताब को लेकर हर जगह दिखाई देते हैं, क्या उन्होंने उसे पढ़ा भी है? क्या उन्हें पता है कि संविधान के अनुसार संसद का संचालन होना चाहिए, संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए तथा संविधान के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाकर मजबूत करना चाहिए? उन्होंने कांग्रेस नेताओं से सवाल किया कि क्या वे वास्तव में संविधान में विश्वास करते हैं?
संसद में चर्चा को लेकर वैष्णव ने कहा कि समाज, देश और राजनीति से जुड़े सभी विषयों पर चर्चा के लिए सरकार ने संसद का मंच उपलब्ध कराया है। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत और संविधान द्वारा स्थापित महत्वपूर्ण संस्था है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या वह इस संस्था में प्रत्येक विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है? यदि कांग्रेस तैयार है, तो वह आज अपनी मांग रख सकती है। उन्होंने कहा कि विशेष सत्र बुलाने से भी सरकार पीछे नहीं हटेगी। कांग्रेस को एसआईआर पर चर्चा करनी है तो उसे संसद में आकर अपनी बात रखनी चाहिए।
रेल मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने पहले भी विभिन्न विषयों पर चर्चा की मांग की है और जिस भी विषय पर उसने चर्चा की मांग रखी, उस पर चर्चा करवाई गई। हालांकि, उनके अनुसार, हर चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता बीच में ही सदन छोड़कर चले गए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर पर चर्चा के दौरान भी कांग्रेस ऐसा ही करेगी और बीच में वॉकआउट करेगी, क्योंकि उसके पास न सच है और न ही कोई ठोस मुद्दा है।
कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए वैष्णव ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर आघात करना चाहती है। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी, कैबिनेट में स्वीकृत अध्यादेश को प्रेस क्लब में जाकर फाड़ने और संविधान की प्रदत्त कैबिनेट व्यवस्था से ऊपर राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (नेशनल एडवाइजरी काउंसिल) का गठन करने जैसी घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने ऐसी व्यवस्थाएं इसलिए बनाईं, क्योंकि उसे कभी संविधान में विश्वास नहीं रहा। उनके अनुसार, कांग्रेस को केवल वोट बैंक की राजनीति में विश्वास रहा है।
वैष्णव ने कहा कि अब वोट बैंक की राजनीति समाप्त हो चुकी है और देश की जनता विकास की राजनीति चाहती है। आज का भारत नए, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के 140 करोड़ नागरिक एक साथ मिलकर इस लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं।
प्रेसवार्ता के दौरान मंच पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा और मीडिया प्रभारी प्रमोद वशिष्ठ उपस्थित रहे।