79वें निरंकारी संत समागम में सतगुरु माता सुदीक्षा जी का संदेश, प्रेम और सेवा पर जोर
हरियाणा के समालखा में 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के पहले दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने प्रेम, ब्रह्मज्ञान और मानवीय एकत्व का संदेश दिया। दूसरे दिन सेवादल रैली में सेवा, विश्वास और परोपकार पर जोर रहा।
हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के मंच पर विराजित सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज।
गंगापुर सिटी, 25 अक्टूबर 2026। हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित चार दिवसीय 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के प्रथम दिन सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को प्रेम, भक्ति, विनम्रता और मानवीय एकत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि परमात्मा का एहसास जीवन में जागृति के भाव को निरंतर बनाए रखता है। समागम के दौरान ब्रह्मज्ञान, सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि उसकी शुरुआत है। वास्तविक जागृति तब आती है, जब मनुष्य जीवन के प्रत्येक पल में निराकार परमात्मा का एहसास करते हुए प्रेम, विश्वास और विनम्रता के साथ जीवन व्यतीत करता है। सत्संग में शामिल होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां से प्राप्त शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे भावों के साथ किए जाने चाहिए। दूसरों के प्रति प्रेम रखना, निंदा और अहंकार से दूर रहना तथा अपनी वाणी और कर्मों से अच्छाई प्रकट करना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति की पहचान है।
सतगुरु माता जी ने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि परमात्मा की ओर से प्राप्त साधनों का उपयोग मानवता की सेवा और परोपकार के लिए करें। जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में मन की शांति, सहजता और विश्वास बनाए रखें। उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कामना की कि सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सेवा, सुमिरन और सत्संग के प्रति समर्पण बना रहे तथा ब्रह्मज्ञान से प्राप्त दिव्य प्रकाश उनके जीवन को सदैव प्रेम, शांति और भक्ति से आलोकित करता रहे।
समागम के दूसरे दिन की शुरुआत भव्य सेवादल रैली से हुई। इसमें भारत के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए हजारों सेवादल बहन-भाइयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली में उपस्थित सेवादल सदस्यों और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते हुए सतगुरु माता जी ने कहा कि सेवा केवल ड्यूटी निभाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन का अभिन्न अंग है। सच्चा सेवादार वही है, जो निरंकार को हृदय में बसाकर हर परिस्थिति में मानवता के कल्याण के लिए तत्पर रहता है।
उन्होंने निरंकार पर अटूट विश्वास बनाए रखने, सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा तन, मन और धन को परोपकार में लगाकर जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा दी।
इससे पहले सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने करकमलों से शांति और एकत्व के प्रतीक मिशन के श्वेत ध्वज का ध्वजारोहण किया। रैली के दौरान संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक श्री एसके जुनेजा ने विश्वभर से आए सेवादल स्वयंसेवकों की ओर से सतगुरु माता जी के चरणों में श्रद्धा अर्पित की और सभी के लिए पावन आशीर्वाद की कामना की।
79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में दिए गए संदेशों के माध्यम से प्रेम, आध्यात्मिक जागृति, सेवा और परोपकार को जीवन में अपनाने पर जोर दिया गया। सतगुरु माता जी ने श्रद्धालुओं को ब्रह्मज्ञान की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारने और मानवता के कल्याण के लिए निरंतर समर्पित रहने का संदेश दिया।