गंगापुर और सहाड़ा में विधिक जागरूकता शिविर, विद्यार्थियों को बताए कानूनी अधिकार और सुरक्षा के उपाय
ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे के तहत विद्यालयों में शिविर आयोजित कर छात्रों को शिक्षा का अधिकार कानून और सुरक्षा प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
गंगापुर के स्कूल में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते न्यायिक अधिकारी और उपस्थित छात्राएं।
गंगापुर, भीलवाड़ा। विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों, सुरक्षा और शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए गंगापुर और सहाड़ा के राजकीय विद्यालयों में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूसडे कार्यक्रम के अंतर्गत तालुका विधिक सेवा समिति, गंगापुर की ओर से आयोजित इन शिविरों में विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और शिक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
तालुका विधिक सेवा समिति के सचिव निखिलेश जीनगर ने बताया कि कार्यक्रम की थीम “सुरक्षित स्थान, जहां सपनों को पंख मिलते हैं : अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ, अपनी सुरक्षा के लिए मजबूती से खड़े रहो। जहां शिक्षा होती है, वहां कोई बच्चा असुरक्षित नहीं होना चाहिए” रखी गई। इस थीम के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और असुरक्षा की स्थिति में आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के तहत अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश अनीता टेलर ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित किया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित दवे ने पीएम श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गंगापुर में विद्यार्थियों को कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। वहीं, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट पारुल चौहान ने राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, सहाड़ा में शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों को विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
शिविरों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि इस अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है। विद्यालयों में आवश्यक सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक, सुरक्षित वातावरण और भेदभाव रहित शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। इस अधिकार को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रिय भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान प्रवेश स्तर पर पात्र बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों के प्रावधान की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों को समझाया गया कि वे अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहें और किसी भी प्रकार की असुरक्षा या अनुचित व्यवहार का सामना करने पर आवाज उठाएं। साथ ही, शिक्षा के लिए सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस दौरान गंगापुर के अधिवक्ता मदनलाल जीनगर, सज्जन बैरवा, अंशुल सुखवाल, पीएलवी नारायणलाल सरगरा, राजेंद्र टेलर, संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं अध्यापकगण उपस्थित रहे। विधिक जागरूकता शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार, विद्यालयों में सुरक्षा और भेदभाव रहित शैक्षणिक वातावरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।