पंचक और पंचांग: जानें रविवार का शुभ मुहूर्त और राहुकाल
पंचांग के अनुसार रविवार को साध्य योग, अभिजीत मुहूर्त और अमृतकाल का खास महत्व रहेगा, जानें सूर्य-चंद्रमा की स्थिति और दिशाशूल।
पंचांग के अनुसार रविवार को शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति का पूरा विवरण दिया गया है।
हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश और पूजा-पाठ की शुरुआत से पहले तिथि, नक्षत्र, योग और ग्रहों की स्थिति का विचार किया जाता है। सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित हिंदू काल-गणना की इस पद्धति के अनुसार, 1 नवंबर रविवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी, जो 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगी।
रविवार को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 44 मिनट पर होगा। दिन में साध्य योग रहेगा, जबकि इसके बाद शुभ योग का आरंभ होगा। वहीं, सूर्य स्वाति नक्षत्र में और तुला राशि में विराजमान रहेंगे। चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। ऐसे में दिन के शुभ-अशुभ समय, ग्रहों की स्थिति और दिशाशूल का ध्यान रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
पंचांग के अनुसार, रविवार को सूर्य देव स्वाति नक्षत्र में स्थित रहेंगे। इस नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता पवन देव यानी वायु हैं और इसके स्वामी राहु माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य के स्वाति नक्षत्र में प्रवेश करने या यहां स्थित रहने पर विशेष प्रभाव देखने को मिलते हैं। इस दौरान लोगों में पुरानी परिस्थितियों और बंधनों से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से कार्य करने की भावना प्रबल होती है।
रविवार को दोपहर 2 बजकर 39 मिनट तक साध्य योग रहेगा। इसके बाद शुभ योग शुरू होगा। साध्य योग 27 नित्य योगों में 22वां स्थान रखता है। साध्य का अर्थ है ऐसा कार्य जिसे पूरा किया जा सके या जो प्राप्त करने योग्य हो। इस योग की देवी माता सावित्री (माता सरस्वती) मानी जाती हैं और इसके प्रमुख ग्रह बुध हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ योग माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में कठिन कार्यों को भी आसानी से पूरा किया जा सकता है।
दिन का अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसे दिन का सबसे शुभ और फलदायी समय माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए कार्यों से अशुभ प्रभाव और दोष स्वतः समाप्त हो जाते हैं। जब सूर्य ठीक सिर के ऊपर होता है, तब अभिजीत मुहूर्त की बेला मानी जाती है।
रविवार को रात 10 बजकर 23 मिनट से 11 बजकर 55 मिनट तक अमृतकाल रहेगा। पंचांग और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह अत्यंत शुभ, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर समय होता है। इसे अमृत के समान उत्तम फल देने वाला माना जाता है। इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक रहती है। नया व्यापार शुरू करने, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए इस समय को श्रेष्ठ माना गया है।
दिन के अशुभ समय की बात करें तो रविवार को राहुकाल शाम 4 बजकर 21 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को किसी नए या शुभ कार्य की शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच की अवधि को आठ बराबर भागों में बांटकर राहुकाल की गणना की जाती है। यह समय प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है। इस दौरान नया कार्य शुरू करने से बचने की मान्यता है, हालांकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं।
यमगंड काल दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इसे मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित समय माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में स्वास्थ्य, दीर्घायु और सामान्य दुर्भाग्य से जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसे नए कार्यों की शुरुआत के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान नया व्यापार या कोई नया काम शुरू करने, यात्रा पर निकलने और पैसों के लेन-देन से बचने की सलाह दी जाती है।
वहीं, गुलिक काल दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से 4 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। इसे विषैला समय भी कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक को अशुभ प्रभाव वाला उपग्रह माना गया है। कहा जाता है कि इस अवधि में शुरू किए गए कार्य नकारात्मक परिणाम दे सकते हैं। इसलिए कोई नया काम शुरू करने से बचना चाहिए, जबकि पहले से चल रहे कार्य जारी रखे जा सकते हैं। हालांकि, बार-बार किए जाने वाले कार्यों के लिए यह समय उपयुक्त माना जाता है। बैंक में पैसे जमा करना, दान देना और निवेश करना भी इस अवधि में अच्छा माना गया है।
ग्रहों की स्थिति के अनुसार, रविवार को सूर्य तुला राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में तुला राशि में सूर्य की स्थिति को नीचस्थ कहा जाता है। सूर्य अग्नि तत्व का कारक है, जबकि तुला राशि वायु तत्व की है और इसका स्वामित्व शुक्र ग्रह के पास है। शुक्र का स्वभाव सूर्य के स्वभाव से विपरीत माना जाता है। सूर्य को अहंकार, आत्मविश्वास और नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। तुला राशि में सूर्य के रहने से आत्मबल और ऊर्जा में कमी महसूस होने की मान्यता है। इस स्थिति में किसी निर्णय पर पहुंचना भी कठिन हो सकता है।
चंद्रमा रविवार को कर्क राशि में रहेंगे। कर्क राशि चंद्रमा की अपनी राशि है और चंद्रमा इसके स्वामी हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा के अपनी ही राशि में स्थित होने पर इसके प्रभाव अधिक गहरे और प्रभावशाली होते हैं। कर्क राशि जल तत्व की राशि है। इस राशि में चंद्रमा की स्थिति से व्यक्ति की कल्पनाशक्ति, कला और रचनात्मकता में वृद्धि होने की मान्यता है।
दिशाशूल की बात करें तो रविवार को पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा को कहा जाता है, जिसमें किसी विशेष दिन यात्रा करना या घर से निकलना अशुभ माना जाता है। ऐसे में 1 नवंबर को यात्रा और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनाते समय पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय और दिशाशूल का ध्यान रखना महत्वपूर्ण रहेगा।