डीग, 14 अगस्त। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA), जयपुर के निर्देशानुसार डीग जिले को न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सौगात मिली है। जिला न्यायालय डीग में स्थाई लोक अदालत (Permanent Lok Adalat) की स्थापना की गई है। इसका विधिवत कार्यभार जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज गौड़ ने संभाल लिया है।

स्थाई लोक अदालत की शुरुआत से डीग जिले के आम नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं और जनोपयोगी विभागों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए लंबी अदालती प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जनता को सुलभ, सस्ता और तुरंत न्याय उपलब्ध कराना है। यहां आपसी सहमति और त्वरित सुनवाई के माध्यम से मामलों का स्थायी समाधान किया जाएगा।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमराज गौड़ ने कहा, “स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य जनता को सुलभ, सस्ता और तुरंत न्याय उपलब्ध कराना है। यहां आपसी सहमति और त्वरित सुनवाई के माध्यम से मामलों का स्थायी समाधान किया जाता है।”

डीएलएसए (DLSA), डीग के राम किशन शर्मा ने कहा, “स्थाई लोक अदालत (PLA) डीग क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी सौगात है। यह व्यवस्था सीधे तौर पर डीग के आमजन को त्वरित व निष्पक्ष न्याय दिलाने में बेहद मददगार साबित होगी और लोगों के न्याय के काम आएगी।”

स्थाई लोक अदालत मुख्य रूप से सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं (Public Utility Services) से जुड़े विवादों का निपटारा करेगी। इनमें जल एवं विद्युत आपूर्ति से जुड़े मामले शामिल हैं, जिनमें लंबे समय तक पानी न मिलना, बिजली कटौती, मीटर में खराबी या त्रुटि और अत्यधिक बिलिंग की समस्याएं शामिल हैं।

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं से जुड़े मामलों में अस्पतालों में उपचार में देरी, दवाओं की अनुपलब्धता या चिकित्सीय सेवाओं में लापरवाही से संबंधित शिकायतों की सुनवाई होगी। इसके अलावा स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन से जुड़े सीवरेज जाम, नालियों की सफाई, शहरी स्वच्छता और ठोस कचरा प्रबंधन संबंधी शिकायतें भी स्थाई लोक अदालत के दायरे में आएंगी।

परिवहन सेवाओं और एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं से जुड़े विवादों की भी सुनवाई की जाएगी। वहीं बैंकिंग सेवाओं की कार्यप्रणाली और बीमा दावों से जुड़े विवाद भी स्थाई लोक अदालत के माध्यम से निपटाए जा सकेंगे।

स्थाई लोक अदालत डीग न्याय क्षेत्र में आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके माध्यम से बिना भारी अदालती खर्च और समय की बर्बादी के सीधे तथा त्वरित न्याय की सुविधा उपलब्ध होगी।

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