डीग के सेवल मंदिर में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, 25 बीघा में बनेगा मॉडल
डीग के सेवल मंदिर में किसानों को प्राकृतिक और मल्टी लेयर फार्मिंग का प्रशिक्षण मिला, 25 बीघा में बनेगा आदर्श प्रशिक्षण मॉडल।
तस्वीर में डीग जिले के सीकरी स्थित सेवल मंदिर परिसर में आयोजित जैविक कृषि प्रशिक्षण शिविर के दौरान विशेषज्ञ आकाश चौरसिया, मंदिर के जमना जीवन कृष्ण दास जी और स्थानीय किसान नजर आ रहे हैं।
डीग जिले के सीकरी स्थित सेवल मंदिर परिसर में किसानों को प्राकृतिक एवं आत्मनिर्भर खेती से जोड़ने के उद्देश्य से जैविक खेती एवं मल्टी लेयर फार्मिंग प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर में मल्टी लेयर फार्मिंग के जनक आकाश चौरसिया ने किसानों को प्राकृतिक खेती, देसी बीज संरक्षण, जैविक खाद निर्माण, प्राकृतिक कीट प्रबंधन और मल्टी लेयर फार्मिंग की व्यवहारिक तकनीकों की जानकारी दी। क्षेत्रभर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया और खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित आकाश चौरसिया को मल्टी लेयर फार्मिंग एवं जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए 20 से अधिक राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा 'ग्राम मित्र युवा राष्ट्रीय सम्मान', पंडित दीनदयाल उपाध्याय कृषि अंत्योदय राष्ट्रीय पुरस्कार, महिंद्रा समृद्धि इंडिया एग्री युवा राष्ट्रीय पुरस्कार, पतंजलि कृषि गौरव राष्ट्रीय पुरस्कार, धरती मित्र नेशनल ऑर्गेनिक फार्मर अवॉर्ड (प्रथम पुरस्कार) तथा आउटस्टैंडिंग यंग पर्सन अवॉर्ड (JCI इंडिया) सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे देशभर में हजारों किसानों को प्राकृतिक खेती एवं मल्टी लेयर फार्मिंग का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
चौरसिया ने बताया कि किसान स्वयं अपने खेत के लिए बीज, जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीम, करंज, धतूरा, आक (मदार) सहित स्थानीय वनस्पतियों तथा गोमूत्र से तैयार जैविक घोल के प्रयोग से विभिन्न प्रकार के कीटों का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। इससे रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम होता है और मिट्टी की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
मल्टी लेयर फार्मिंग के बारे में चौरसिया ने बताया कि जिस प्रकार शहरों में कम जगह होने पर बहुमंजिला इमारतें बनाई जाती हैं, उसी प्रकार खेत में भी एक ही भूमि का अलग-अलग स्तरों पर उपयोग कर कई प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। इसे मल्टी लेयर फार्मिंग कहा जाता है।
इस पद्धति में जमीन के अंदर अदरक, हल्दी एवं शकरकंद जैसी कंद फसलें, भूमि की सतह पर पालक, मेथी एवं धनिया जैसी पत्तेदार सब्जियां, मचान पर लौकी, करेला, तोरई एवं खीरा जैसी बेल वाली सब्जियां तथा ऊपरी स्तर पर पपीता, सहजन एवं अमरूद जैसे फलदार पौधे लगाए जाते हैं। इससे एक ही खेत से पूरे वर्ष विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन लिया जा सकता है।
चौरसिया ने बताया कि पारंपरिक खेती से किसान को प्रति बीघा औसतन लगभग 25 हजार रुपए वार्षिक आय प्राप्त होती है, जबकि मल्टी लेयर फार्मिंग अपनाकर प्रति बीघा लगभग 80 हजार रुपए या उससे अधिक वार्षिक आय अर्जित की जा सकती है। इस तकनीक से कम भूमि, कम पानी और कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और प्राकृतिक रूप से कीट प्रबंधन भी संभव हो जाता है।
सेवल मंदिर के जमना जीवन कृष्ण दास जी ने बताया कि किसानों को व्यवहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंदिर परिसर की 25 बीघा भूमि पर मल्टी लेयर फार्मिंग का आदर्श मॉडल विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही यहां प्राकृतिक खेती एवं मल्टी लेयर फार्मिंग का स्थायी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस केंद्र पर आसपास के गांवों एवं जिले के किसानों के लिए नियमित प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। यहां किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि खेत में उतरकर व्यवहारिक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे अपने खेतों में इस तकनीक को सफलतापूर्वक अपनाकर उत्पादन और आय दोनों बढ़ा सकें।
उन्होंने कहा कि सेवल मंदिर का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ना, खेती की लागत कम करना तथा आत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि मॉडल को बढ़ावा देना है। आने वाले समय में यह केंद्र क्षेत्र के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती सीखने और अपनाने का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम के दौरान किसानों ने खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे, जिनका श्री आकाश चौरसिया ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समाधान दिया। अंत में उपस्थित किसानों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे शिविरों के नियमित आयोजन की आवश्यकता जताई।