चेम्बूर में पर्युषण की छठी आराधना: साध्वी निर्वाणश्री ने सुनाया भगवान महावीर का साधनाकाल
चेम्बूर में पर्युषण की छठी आराधना में साध्वी निर्वाणश्री ने भगवान महावीर के साधनाकाल और समता का वर्णन किया, जप की महिमा भी बताई।
तस्वीर में मंच पर बैठी हुई साध्वियां और सामने श्रोतागण दिख रहे हैं।
पर्युषण महापर्व की आराधना के छठे दिन चेम्बूर में भगवान महावीर के तेजस्वी साधनाकाल और उनकी अटूट समता का प्रभावी वर्णन किया गया। विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि भगवान महावीर का साधनाकाल उपसर्गबहुल था, लेकिन विभिन्न उपद्रवों के बीच भी वे मेरु की भांति अविचल रहे। उनका हृदय परकल्याण के भावों से आपूरित था।
साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि चाहे शूलपाणि यक्ष के उपसर्ग हों या ग्वाले के, राक्षसी शक्तियां हों या तिर्यंचकृत उपद्रव, भगवान महावीर समता के महासाधक थे। अस्थिकग्राम में शूलपाणि के अट्टहास से वनप्रदेश भी प्रकंपित हो गया, लेकिन भगवान अविचल रहे। रातभर वे शूलपाणि द्वारा दिए गए कष्टों से जूझते रहे। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का जीवन हमारी राहों में आलोक भरता है।
साध्वी डा. योगक्षेमप्रभा ने अपने विशेष वक्तव्य में भगवान पार्श्वनाथ के पूर्वजन्मों की रोचक घटनाएं सुनाईं। उन्होंने जप की महिमा प्रतिपादित करते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ कलयुग के कल्पतरु हैं। उनके भवांतर की कथा ही हमें मैत्री व समता की प्रेरणा देती है। उनका जप सभी बाधाओं का हरण कर आत्मिक आनंद की सृष्टि करता है।
साध्वी कुंदनयशा ने जप दिवस के संदर्भ में अपने उद्गार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ महिला मंडल के ‘जप गीत’ से हुआ। साध्वी ने नमस्कार महामंत्र के समुच्चार के पश्चात ध्यान का प्रयोग करवाया।
कार्यक्रम में घाटकोपर के विधायक रामकदम और तेरापंथ सभा, मुंबई के अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
रात्रि कार्यक्रम में व्याख्यान से पूर्व त्रिशरण प्रबोध का संगान हुआ। इसके बाद कन्यामंडल चेम्बूर द्वारा गोल्डन लाइफस्टाइल जेएलएस की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। मंच संचालन तेजराज बंबोली ने किया।
पर्युषण महापर्व की इस छठी आराधना में भगवान महावीर के साधनाकाल, भगवान पार्श्वनाथ के पूर्वजन्मों और जप की महिमा के माध्यम से समता, मैत्री और आत्मिक साधना के संदेश को प्रमुखता से रखा गया।