तस्वीर में मुंगाना के देवनारायण मंदिर परिसर में आयोजित संत रविदास संस्कार केंद्र के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथि और गणमान्य नागरिक नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी। संत शिरोमणि रविदास जी के 650वें जन्म जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आदर्श विद्या निकेतन माध्यमिक कपासन द्वारा समाजसेवी अभय सोमानी के आर्थिक सौजन्य से देवनारायण मंदिर परिसर, मुंगाना में संत रविदास सरस्वती संस्कार केंद्र का शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत बाल कार्य एवं विद्या भारती के जिला संस्कार केंद्र प्रमुख दिनेश चंद्र भट्ट ने सेवा बस्तियों में विद्या भारती द्वारा संचालित संस्कार केंद्रों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अच्छी शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों की आवश्यकता भी बढ़ गई है। संस्कार केंद्र समाज के सहयोग से इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

दिनेश चंद्र भट्ट ने संत रविदास जी के जीवन परिचय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे महान संत थे। उनका जन्म माघ पूर्णिमा, विक्रम संवत 1433 को बनारस में हुआ था। उन्होंने कहा, “चौदह से तैतीस की माघ सुदी पंदरास, दुखियों के कल्याण हित प्रगटे श्री रविदास।”

उन्होंने बताया कि संत रविदास के गुरु रामानंद जी थे, जिन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दी में वही कार्य किया जो आर्य समाज ने 19वीं और 20वीं सदी में धर्म रक्षा व रोकीकरण की टोली खड़ी कर किया। उस समय सभी जाति समाज में से उनके कुल 52 शिष्यों की टोली थी, जिसमें संत रविदास और कबीरदास जैसे महान संत हुए।

कार्यक्रम में बताया गया कि सदना कसाई नामक फकीर से संत रविदास का शास्त्रार्थ हुआ था। शर्त के अनुसार पराजित होने पर सदना कसाई हिंदू बना और उसका नाम रामदास रखा गया।

दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि दिल्ली के शासक सिकंदर लोदी ने भी संत रविदास को प्रलोभन और यातना के माध्यम से हिंदू से मुसलमान बनाने का प्रयास किया, लेकिन संत रविदास अत्याचारों के आगे नहीं झुके। लोदी को हर जगह और हर समय रविदास दिखने लगे। इस भय के कारण उन्हें जेल से मुक्त करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने हिंदू धर्म रक्षक बनकर उस आंधी में हिंदू धर्म में घर वापसी का बड़ा कार्य कराया, जिससे हिंदू धर्म आगे बढ़ा। उनके प्रमुख कार्यों में इस्लामीकरण को रोकना, युद्ध बंदियों के रूप में अछूत व कंगाल बने समाज बंधुओं में गौरव की भावना जगाना तथा धर्म के प्रति अधिक आस्था और श्रद्धा पैदा करना शामिल रहा।

मुख्य वक्ता दिनेश चंद्र भट्ट ने कहा कि वास्तव में यह वर्ष देश के हर नागरिक को संत रविदास जी के जीवन का अध्ययन करते हुए प्रेरणा लेकर देश, धर्म और समाज की सर्वांगीण उन्नति में अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने स्वतंत्रता का आह्वान करते हुए संत रविदास के पद के माध्यम से समाज को प्रेरणा दी—“पराधीन का दीन क्या, पराधीन बेदीन। रविदास दास पराधीन को, सभी समझे हीन। ऐसा चाहूं राज में जहां मिले सबन को अन्न, छोट बड़ों सब सम बसें, रविदास रहे प्रसन्न।”

संस्कार केंद्र के उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन श्री कैलाश चंद्र गाडरी ने किया। अतिथियों का परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री नितेश कुमार जी भट्ट ने कराया। विद्यालय प्रबंध समिति के सचिव अंबिका प्रसाद जी जायसवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर भामाशाह अभय कुमार सोमानी, आदर्श विद्या निकेतन माध्यमिक कपासन विद्यालय समिति के सदस्य, आचार्य, दीदी, सेवा बस्ती के भैया-बहिन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड एवं जिले के कार्यकर्ता, ग्राम के प्रबुद्ध जन और माताएं उपस्थित थीं।

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