चित्तौड़गढ़ में सोशल मीडिया पर मेवाड़ और सनातन धर्म के विरुद्ध अपमानजनक नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद, सर्व हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं ने कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा।   

चित्तौड़गढ़। सोशल मीडिया पर मेवाड़ और सनातन धर्म के विरुद्ध अपमानजनक नारेबाजी का वीडियो वायरल होने के बाद सर्व हिंदू समाज में आक्रोश है। मामले में कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर सर्व हिंदू समाज की ओर से पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में वायरल वीडियो में शामिल युवकों की पहचान कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में बताया गया कि विगत दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें कुछ युवक सुनियोजित रूप से ‘मेवाड़ का राजा दीवाना, उदयपुर का राजा मस्ताना’ जैसे नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। सर्व हिंदू समाज ने इन नारों को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कहा कि इससे समाज में भारी आक्रोश व्याप्त हुआ है।

ज्ञापन में कहा गया कि मेवाड़ की धरती का इतिहास स्वाभिमान, शौर्य और बलिदान का इतिहास रहा है। मेवाड़ ने कभी किसी मुगल या विदेशी आक्रांता की दासता स्वीकार नहीं की। महाराणा प्रताप और राणा सांगा जैसे वीरों की यह भूमि रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यहां कोई मुस्लिम शासक कभी राजा नहीं रहा। ऐसे में इस प्रकार का मिथ्या प्रचार मेवाड़ के गौरवमयी इतिहास को विकृत करने का प्रयास है।

सर्व हिंदू समाज की ओर से कहा गया कि इस तरह के भ्रामक और उत्तेजक नारों से मेवाड़वासियों, सनातन समाज और आमजन की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है। साथ ही, इसे क्षेत्र में तनावपूर्ण वातावरण बनाने का प्रयास बताया गया। ज्ञापन में इस कृत्य को जानबूझकर दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास भी बताया गया।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में भी इस प्रकार से नारेबाजी कर शहर के माहौल को बिगाड़ा गया था। इस दौरान सुरेंद्र सिंह सोलंकी, श्रवण सोनी, गोपाल शर्मा, दर्शन चतुर्वेदी, प्रवीण लड्ढा, रवि पांडिया, रितेश गोस्वामी, भरत सिंह राठौड़, सावन सोनी सहित सर्व हिंदू समाज के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सर्व हिंदू समाज के कार्यकर्ताओं ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए इसमें शामिल युवकों की पहचान करने और उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि ऐसी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति मेवाड़ की अस्मिता और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ न कर सके।

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