टारगेटेड केस स्कीम का आदेश वापस, अधिवक्ताओं की जीत पर चित्तौड़गढ़ में विजय दिवस
राजस्थान उच्च न्यायालय की टारगेटेड केस स्कीम के विरोध में 27 अगस्त से जारी अधिवक्ताओं की हड़ताल 2 सितंबर को आदेश वापसी के साथ समाप्त हुई। चित्तौड़गढ़ में अधिवक्ताओं ने विजय जुलूस, आतिशबाजी और मिठाई बांटकर जश्न मनाया।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ न्यायालय परिसर में विजय दिवस के अवसर पर माला पहने हुए और जश्न मनाते हुए अधिवक्ता नजर आ रहे हैं।
चित्तौड़गढ़। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा लागू की गई टारगेटेड केस स्कीम योजना के विरोध में प्रदेशभर में चल रहा अधिवक्ताओं का आंदोलन निर्णायक जीत के साथ समाप्त हो गया। 27 अगस्त से जारी हड़ताल के बाद 2 सितंबर को उच्च न्यायालय ने उक्त आदेश वापस ले लिया। आदेश वापस होने के बाद चित्तौड़गढ़ सहित पूरे प्रदेश के अभिभाषक समुदाय में हर्ष की लहर फैल गई।
जिला अभिभाषक संस्थान अध्यक्ष अधिवक्ता नरेश शर्मा के सशक्त नेतृत्व में चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज प्रदेश स्तर पर बुलंद की। अधिवक्ताओं का स्पष्ट रुख था कि न्याय केवल मामलों के निस्तारण की संख्या गिनना नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
7 दिनों तक चले संगठित विरोध के सामने उच्च न्यायालय ने 2 सितंबर को टारगेटेड केस स्कीम योजना का आदेश वापस ले लिया। अधिवक्ताओं ने इसे अधिवक्ता एकता और न्याय की गरिमा की जीत बताया। आंदोलन की निर्णायक सफलता के बाद चित्तौड़गढ़ के अधिवक्ताओं में उत्साह का माहौल रहा।
इस ऐतिहासिक सफलता के उपलक्ष्य में गुरुवार को न्यायालय परिसर में विजय दिवस मनाया गया। अधिवक्ताओं ने भव्य विजय जुलूस निकाला और जोरदार आतिशबाजी कर जीत का जश्न मनाया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की।
विजय दिवस आयोजन में उपाध्यक्ष चांदनी बैरागी, सचिव लोकेन्द्र सिंह राणावत, सहसचिव विशाल सिंह भाटी, कोषाध्यक्ष कमलेश सुखवाल, पुस्तकालय प्रभारी रोहित खटीक सहित संस्थान के पूर्व अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे। सात दिनों तक चले आंदोलन के बाद आदेश की वापसी को अधिवक्ता समुदाय ने अपनी एकजुटता और न्याय की गरिमा से जुड़े रुख की सफलता के रूप में मनाया।