बागी और निर्दलीयों को मनाने में जुटे भाजपा-कांग्रेस, नामांकन वापसी के दिन झोंकी ताकत
चित्तौड़गढ़ नगर निकाय चुनाव में नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा-कांग्रेस ने बागियों और निर्दलीयों को मनाने में पूरी ताकत झोंकी। लगभग 360 नामांकन के बाद कई प्रत्याशियों ने फार्म वापस लिए, अब मुकाबले की तस्वीर साफ।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ नगर निकाय चुनाव के संदर्भ में कार्यालय परिसर के बाहर खड़े प्रत्याशी और उनके समर्थक नजर आ रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां नामांकन वापसी के अंतिम दिन और तेज हो गईं। नगर परिषद के सभी 60 वार्डों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। 60 वार्डों में कुल मिलाकर लगभग 360 नामांकन फार्म दाखिल किए गए थे। इसके बाद से ही भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता असंतुष्ट प्रत्याशियों, बागियों और निर्दलीयों को मनाने में जुटे हुए थे। गुरुवार को नामांकन वापसी के अंतिम दिन दोनों दलों ने बागियों और निर्दलीय प्रत्याशियों को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगा दी।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा और कांग्रेस के चुनाव कार्यालयों के साथ वरिष्ठ नेताओं के आवासों पर भी गहमागहमी बनी रही। प्रत्याशियों को अपने-अपने नामांकन फार्म वापस लेने के लिए राजी करने का सिलसिला आखिरी समय तक चलता रहा।
टिकट नहीं मिलने से नाराज कई दिग्गज नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नामांकन दाखिल करने के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया था। इससे दोनों प्रमुख दलों के आधिकारिक प्रत्याशियों के वोट कटने और चुनावी समीकरण बिगड़ने की आशंका बनी हुई थी। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बागी प्रत्याशियों से घर-घर जाकर संपर्क किया। वरिष्ठ नेताओं ने असंतुष्टों को संगठन में सम्मानजनक पद और भविष्य में अवसर देने का आश्वासन देकर नामांकन फार्म वापस लेने के लिए राजी करने का प्रयास किया, जिसमें सफलता भी मिली।
कांग्रेस खेमे में भी बागियों को साधने के लिए इसी तरह प्रयास किए गए। वरिष्ठ नेताओं ने असंतुष्ट प्रत्याशियों से वन-टू-वन वार्ता कर उन्हें चुनाव में पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी को समर्थन देने के लिए राजी किया।
नामांकन वापसी की प्रक्रिया समाप्त होने के समय तक निर्वाचन कार्यालय में प्रत्याशियों की भीड़ नजर आई। दोनों दलों की ओर से किए गए मान-मनुहार के प्रयासों का असर भी दिखाई दिया और खासी संख्या में बागियों तथा निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने-अपने आवेदन पत्र वापस ले लिए। दोनों दलों के रणनीतिकारों का मानना है कि निर्दलीयों के नामांकन वापस लेने से अब चुनावी मुकाबला अधिक स्पष्ट होगा और वोटों के बिखराव को रोका जा सकेगा।
नामांकन वापसी का समय समाप्त होने के साथ ही अंतिम चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए गए हैं। इसके बाद चुनावी मैदान में बचे प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। जिन वार्डों में बागी प्रत्याशी मैदान में टिके रह गए हैं, वहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जबकि बाकी वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी भिड़ंत की स्थिति बनेगी।
नामांकन वापसी के अंतिम दिन के बाद अब दोनों दलों के उम्मीदवार और उनके समर्थक पूरी ताकत के साथ जनसंपर्क और प्रचार अभियानों में जुट गए हैं। ऐसे में बागियों और निर्दलीयों की मौजूदगी या वापसी ने नगर परिषद के 60 वार्डों में चुनावी मुकाबले की तस्वीर को निर्णायक रूप से प्रभावित किया है।