जाशमा मंगरा में जिला स्तरीय वाकपीठ संपन्न, जाड़ावत बोले- शारीरिक शिक्षक अनुशासन और संस्कार के सबसे बड़े प्रहरी
जाशमा मंगरा स्थित शनिधाम में आयोजित प्रारंभिक शिक्षा विभाग के शारीरिक शिक्षकों की दो दिवसीय जिला स्तरीय वाकपीठ का समापन हुआ। पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने खेल संस्कृति, अनुशासन, संस्कार, नई शिक्षा नीति और ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर महत्वपूर्ण विचार रखे।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के शारीरिक शिक्षकों की दो दिवसीय जिला स्तरीय वाकपीठ का समापन मंगलवार को जाशमा मंगरा स्थित शनिधाम परिसर में हुआ। समापन समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने कहा कि शारीरिक शिक्षक केवल खेल प्रशिक्षक नहीं, बल्कि विद्यालयों में अनुशासन, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण के सबसे बड़े प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि उनके मार्गदर्शन से ही बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, टीम भावना और राष्ट्रभक्ति जैसे गुण विकसित होते हैं। जाड़ावत ने कहा कि यदि खेलों में आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों का बढ़ता मोबाइल आकर्षण चिंता का विषय है। ऐसे में अभिभावकों के साथ-साथ शिक्षकों, विशेष रूप से शारीरिक शिक्षकों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को खेल मैदान की ओर प्रेरित करें। उनके अनुसार खेल न केवल शरीर को स्वस्थ बनाते हैं, बल्कि जीवन में अनुशासन, धैर्य और संघर्ष की भावना भी विकसित करते हैं।
समारोह की अध्यक्षता पूर्व प्रधान एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष भेरूलाल जाट ने की। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रधान एवं भामाशाह भगवतीलाल हिंगड़ ने कहा कि शारीरिक शिक्षक बच्चों में खेल प्रतिभा के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में खेल गतिविधियों को मजबूत किए बिना समग्र शिक्षा की कल्पना अधूरी है।
कार्यक्रम में शनिधाम मंदिर अध्यक्ष शांतिलाल जाट, पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि एवं इंटक नेता सत्तार शेख, जगदीश जाट, शंकर खटीक, सीबीईओ लक्ष्मणसिंह चुंडावत, एसीबीईओ ताज मोहम्मद तथा संगोष्ठी के जिलाध्यक्ष तिलकेश आचार्य सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
वाकपीठ के दूसरे दिन विभिन्न खेलों और योग पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण एवं व्याख्यान दिए। प्रतिभा दशोरा ने योग एवं प्राणायाम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। मुकेश कुमार मालू ने बैडमिंटन, हरिकिशन खटीक ने तैराकी, कैलाश जाट ने क्रिकेट, कैलाशचंद्र मालू ने खो-खो, संजय बारेगामा ने टेनिस बॉल क्रिकेट, अरविंद तिवारी एवं मोहनलाल सोनी ने वॉलीबॉल तथा अभिषेक शर्मा ने टेबल टेनिस के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में भूपालसागर के सभी शारीरिक शिक्षकों ने खेलकूद अनुभाग के जगदीश चंद्र खटीक, शारीरिक शिक्षक संतोष भट्ट, मोहनलाल छींपा एवं भगवतीलाल मेनारिया के नेतृत्व में अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।
समारोह के दौरान शिक्षा एवं खेल क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शारीरिक शिक्षकों एवं पदाधिकारियों का सम्मान भी किया गया। संगोष्ठी के जिलाध्यक्ष तिलकेश आचार्य, जगदीश चंद्र खटीक, पारस टेलर तथा नानालाल पुर्बिया को सम्मानित किया गया। वहीं 14 वर्ष आयु वर्ग के राजस्थान राष्ट्रीय पूर्व प्रशिक्षण शिविर के सफल आयोजन तथा जिला स्तरीय लॉन टेनिस प्रतियोगिता में बुद्धाखेड़ा विद्यालय को प्रथम स्थान दिलाने वाले शारीरिक शिक्षक उज्ज्वल दाधीच को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर शारीरिक शिक्षक जोगेन्द्र सिंह राणावत, कैलाश तोतला, निर्देश बांगड़ा, शंभू सिंह चौहान, गजेंद्र सिंह भाटी, दलपत सिंह चुंडावत, कानसिंह राठौड़, राहुल वोट, अनिल सेठिया, नरेंद्र सिंह चुंडावत, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) राजस्थान के कैलाशचंद्र मालू सहित जिलेभर के शारीरिक शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पारस टेलर ने किया। जिला स्तरीय वाकपीठ का समापन खेलों में नवाचार, नई शिक्षा नीति, खेल संस्कृति और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित विचार-विमर्श के साथ हुआ।