महर्षि वेदव्यास जयंती पर साहित्य परिषद का भव्य आयोजन, गुरु महिमा और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन

महर्षि वेदव्यास जयंती पर निंबाहेड़ा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, चित्तौड़गढ़ ने आयोजन किया। गुरु महिमा, वेदव्यास के साहित्यिक योगदान, भारतीय ज्ञान परंपरा और बालिका शिक्षा सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने विचार रखे। जानिए कार्यक्रम की प्रमुख बातें।

Update: 2026-07-28 12:27 GMT

तस्वीर में निंबाहेड़ा स्थित निजी विद्यालय में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथि और कार्यकर्ता नजर आ रहे हैं।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद, चित्तौड़गढ़ द्वारा महर्षि वेदव्यास जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन मोती बाजार, निंबाहेड़ा स्थित एक निजी विद्यालय में किया गया, जिसमें साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और गुरु की महत्ता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए गए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष रतनलाल मेनारिया ने की। मुख्य अतिथि पूर्व सरपंच कन्हैयालाल मेनारिया रहे, जबकि वरिष्ठ सदस्या तरुणा गोखरू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अतिथियों ने मां शारदा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। परिषद गीत की प्रस्तुति सुशीला माहेश्वरी ने दी।

परिषद के प्रदेश पदाधिकारी डॉ. रविंद्र कुमार अपअध्याय ने गुरु की महिमा पर व्याख्यान देते हुए कहा कि बिना गुरु के जीवन को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि गुरु ही मनुष्य को इस भवसागर से पार ले जा सकता है तथा एक सामान्य बालक को चंद्रगुप्त और शिवाजी बनाने की क्षमता भी गुरु में ही होती है।

परिषद के पूर्व प्रांत उपाध्यक्ष श्रीपाल सिसोदिया ने कहा कि महर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संकलन कर उन्हें लिपिबद्ध करने का अभूतपूर्व कार्य किया, इसी कारण उन्हें वेदव्यास के नाम से जाना जाता है।

संभाग संयोजक पंकज कुमार झा ने परिषद की नई सांगठनिक रचना की जानकारी दी। उन्होंने महर्षि वेदव्यास के साहित्यिक अवदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का छात्र विज्ञान को मानता है और जब पुराणों में वर्णित जानकारियों को विज्ञान के दृष्टिकोण से समझाया जाएगा तो वह उनका अनुकरण भी करेगा और उनका अध्ययन भी करेगा।

इस अवसर पर दीपिका सत्यदीप ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि कन्हैयालाल मेनारिया ने बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। पूर्व अधिशाषी अभियंता हजारीलाल मेघवाल ने कहा कि पुराने समय में जो कार्य देवरे पर भोपे किया करते थे, वही कार्य आज काउंसलर मोटी फीस लेकर कर रहे हैं।

अध्यक्षता कर रहे रतनलाल मेनारिया ने परिषद के इतिहास की जानकारी देते हुए उसके विभिन्न कार्यक्रमों से उपस्थितजनों को अवगत कराया। विशिष्ट अतिथि तरुणा गोखरू ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में उमेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया, जबकि संचालन सत्य नारायण जोशी ने किया।

कार्यक्रम में बाल मुकुंद कुमावत, घनश्याम तोसावड़ा, उमेश शर्मा, श्यामा सोलंकी, कमल कांत दत्ता, संजय सुराणा और शशि कुमार जोशी सहित अनेक प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। महर्षि वेदव्यास जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, गुरु परंपरा और साहित्यिक विरासत के संरक्षण एवं प्रसार पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया।

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