डूंगला में एलवा माता मेला संपन्न, उमड़े श्रद्धालु
अरावली पहाड़ियों पर स्थित एलवा माता मंदिर में नौ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का हवन और मेले के साथ समापन हुआ।
डूंगला में एलवा माता मेले के दौरान उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़.
डूंगला। एलवा माता मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का सोमवार को यज्ञ-हवन और मेले के साथ समापन हुआ। माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। दिनभर मंदिर परिसर और मेले में भक्तों की आवाजाही बनी रही, जबकि देर रात तक दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ जुटी रही। भारी भीड़ के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों को मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान ग्रामीण श्रद्धालुओं ने मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए कई सुझाव भी दिए।
मंदिर अध्यक्ष नारायण लाल व्यास ने बताया कि नौ दिवसीय कार्यक्रम के तहत सोमवार को मेले का आयोजन किया गया। समापन अवसर पर आयोजित यज्ञ-हवन में नारायण लाल व्यास, मुकेश व्यास सहित अन्य यजमानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां दीं और क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
मेले के दौरान तलहटी से लेकर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित मंदिर तक मार्ग के दोनों ओर विभिन्न वस्तुओं की दुकानें सजी रहीं। झूले, चकरी, चाट-पकौड़ी, शीतल पेय और कोल्ड ड्रिंक की दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रही। प्रसाद और फूल-मालाओं की दुकानों पर भी अच्छी बिक्री हुई। मेले को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह देखने को मिला।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए डूंगला थाना प्रभारी ओम सिंह पुलिस जाब्ते के साथ तैनात रहे। पुलिस प्रशासन ने चप्पे-चप्पे पर निगरानी रखते हुए व्यवस्था संभाली। वहीं, चित्तौड़गढ़ की एसपीवाय बाउंसर एंड सिक्योरिटी की नर्मदा कुमारी के नेतृत्व में सुरक्षा कर्मियों ने मंदिर परिसर और मेले में व्यवस्थाएं बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाली।
मेले के दौरान ग्राम पंचायत डूंगला और डूंगला पुलिस थाने की ओर से स्टॉल भी लगाए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से श्रद्धालुओं को विभिन्न व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
मेले में पहुंचे ग्रामीण श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत भी उठाई। देवीलाल ने कहा कि मंदिर में जगह की कमी के कारण श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन करने में परेशानी होती है। उन्होंने यज्ञशाला को मुख्य मंदिर से अलग स्थान पर स्थानांतरित करने का सुझाव दिया।
रामेश्वर लाल ने मंदिर के बाहर दोनों ओर प्रसाद की दुकानें लगने से रास्ता संकरा होने की समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मंदिर प्रशासन से प्रसाद और फूल-माला के व्यवसायियों को घाटी से नीचे की ओर व्यवस्थित दुकानें आवंटित करने की मांग की।
दिनेश चंद्र ने घाटी के ऊपर स्थित खुले मैदान में हवन कुंड बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे माता के भक्तों को नारियल होम करने में सुविधा मिलेगी और यज्ञशाला की परिक्रमा के लिए भी उचित व्यवस्था हो सकेगी। श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि मंदिर प्रशासन इन सुझावों पर विचार कर भविष्य में व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाएगा।
मेले के समापन पर मंदिर अध्यक्ष नारायण लाल व्यास ने मेले में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं, अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस दल और ग्राम पंचायत के कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से मेले की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकीं।
इस अवसर पर ओंकार लाल व्यास, पूरणमल अहीर, मुकेश व्यास, दुर्गा शंकर, नाथूलाल हर्षित सोनी सहित मंदिर कार्यकारिणी के विभिन्न सदस्य उपस्थित रहे। मेले में देर रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही और दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बनी रही।