तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विधायक चंद्रभान सिंह आक्या से बैठकर बात करते हुए।

चित्तौड़गढ़। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बुधवार को चित्तौड़गढ़ से विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के पैतृक गांव आक्या पहुंचे। उन्होंने विधायक आक्या के पिता दिवंगत रामसिंह आक्या के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर संवेदनाएं प्रकट कीं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा गांव आक्या में विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के निवास पहुंचे और दिवंगत रामसिंह आक्या के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री करीब आधे घंटे तक आक्या परिवार के साथ रहे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा इस कठिन घड़ी में परिवार को संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।

इस दौरान सहकारिता मंत्री गौतम दक, भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष रतनलाल गाडरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद्र कृपलानी, विधायक अर्जुनलाल जीनगर, डॉ. सुरेश धाकड़, नगर परिषद सभापति अनिल ईनाणी तथा उपसभापति सुदर्शन रामपुरिया सहित क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेता, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

इससे पूर्व राज्य मंत्री ओटाराम देवासी, सहाड़ा विधायक लादुलाल पितलीया, आसींद विधायक जब्बरसिंह सांखला, राजस्थान राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों और आमजनों ने ग्राम आक्या पहुंचकर विधायक आक्या को उनके पिता के निधन पर दुख प्रकट करते हुए शोक व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए थे। हेलीपैड से लेकर विधायक निवास तक चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा तैयार किया गया था। उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव, चित्तौड़गढ़ एसपी धर्मेंद्र सिंह यादव और अति पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा व्यवस्थाओं की निगरानी में तैनात रहे। जिले के पांच डीएसपी, विभिन्न थानों के थाना प्रभारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा। प्रशासन ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा, जिससे मुख्यमंत्री का दौरा बिना किसी बाधा के शांतिपूर्ण संपन्न हुआ।

दिवंगत रामसिंह आक्या का जन्म 1 जनवरी 1953 को हुआ था। 28 सितंबर को 73 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, जिसके बाद 29 सितंबर को उनका अंतिम संस्कार किया गया। वे क्षेत्र के सबसे अनुभवी और सम्मानित जनप्रतिनिधियों में से एक माने जाते थे। रामसिंह आक्या लगातार 8 बार गांव के सरपंच चुने गए और लगभग 40 वर्षों तक इस जिम्मेदारी को संभाला।

चार दशकों तक गांव के सर्वांगीण विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर सक्रिय रहने के कारण पूरे क्षेत्र में उनका गहरा प्रभाव और विशेष पहचान थी। उनके निधन के बाद से ही आक्या गांव में शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों का लगातार आना-जाना बना हुआ है।

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