Chittorgarh: महर्षि गर्गाचार्य जन्मोत्सव पर निकाली शोभायात्रा, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान
गर्ग ब्राह्मण समाज के समारोह में संत मोहन शरण शास्त्री ने गर्गाचार्य के योगदान पर प्रकाश डाला; भामाशाहों और प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
तस्वीर में पारंपरिक परिधान पहने महिलाएं शोभायात्रा के दौरान सड़क पर नृत्य करती दिख रही हैं।
चित्तौड़गढ़। महर्षि गर्गाचार्य के जन्मोत्सव पर गर्ग ब्राह्मण समाज सामूहिक विवाह संस्थान की ओर से जन्मोत्सव समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर नगर में रंग-बिरंगे परिधानों में सजी आकर्षक झांकियों के साथ शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें समाज के महिला-पुरुषों ने नाचते-गाते भाग लिया। शोभायात्रा के दौरान महर्षि गर्ग ऋषि के जयकारों से वातावरण गूंजायमान रहा।
समारोह में मुख्य धर्म प्रवाहक के रूप में संत मोहन शरण शास्त्री ने कहा कि महर्षि गर्गाचार्य अपने समकालीन विषयों में सबसे श्रेष्ठ एवं ज्येष्ठ थे। द्वापर युग में वही एकमात्र ब्रह्म ऋषि थे, जिन्होंने अपनी दिव्य-सिद्धियों से भगवान कृष्ण एवं बलराम का नामकरण संस्कार किया, जबकि द्वापर युग में कंस के अत्याचार के संक्रमण काल में कोई भी ऋषि यह संस्कार नहीं कर पाए थे। उन्होंने कहा कि गर्ग ब्राह्मण समाज को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि वे सर्वश्रेष्ठ हैं। संत शरण शास्त्री ने सभी का आह्वान किया कि वे गर्ग ऋषि द्वारा बताए मार्ग का अनुसरण करें।
संस्थान के समाज अध्यक्ष सूर्य प्रकाश गर्ग ने बताया कि मुख्य समारोह भरत बाग में आयोजित हुआ। समारोह के प्रारंभ में परशुराम रामायण मंडल के भागवताचार्य पंडित जनार्दन मौड़ के सानिध्य में कथाप्रवाहिका खुशी गर्ग ने ऋषि पंचमी पर कथा प्रवचन किया।
राधेश्याम, चंचल कुमार एवं पूर्णाशंकर गर्ग ने बताया कि प्रातः हवन-पूजन के पश्चात संपूर्ण गर्ग ब्राह्मण समाज के महिला-पुरुषों ने नगर में निकाली गई शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया। शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां शामिल रहीं और समाजजन नाचते-गाते हुए आगे बढ़े। इस दौरान गर्ग ऋषि के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।
मुख्य समारोह में समाज की सभी प्रतिभाओं एवं भामाशाहों का सम्मान किया गया। समारोह में अंतरराष्ट्रीय गुर्जरगौड समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरकण्ठ उपाध्याय, विप्र फाउंडेशन के मनीष त्रिपाठी, मदन उपाध्याय, नीलम शर्मा, सुनीता व्यास, नीरू चतुर्वेदी, दीपिका सहित दीपक शर्मा, ओमप्रकाश, राधेश्याम, अशोक, गणेश लाल, कैलाश, फूलचंद शर्मा, नानालाल, मनोहर लाल, कन्हैयालाल सहित कई लोग उपस्थित रहे।
कमलकांत गर्ग द्वारा सभी को शिक्षाप्रद गणित चालीसा भेंट की गई। अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ, जिसके बाद महाप्रसाद का आयोजन किया गया।