तस्वीर में बड़ीसादड़ी के समता भवन में पर्युषण पर्व के अवसर पर तपस्वियों और समाज के लोग सामूहिक रूप से खड़े नजर आ रहे हैं।

बड़ीसादड़ी में आचार्य रामलालजी म. सा. की साध्वी प्रियलक्षणाजी म. सा. आदि ठाणा-5 के सानिध्य में पर्युषण पर्व श्रद्धा और आत्मसंयम के साथ मनाया गया। आठ दिनों तक चले पर्व के दौरान धर्म आराधना, तपस्या और त्याग का विशेष माहौल रहा। इस दौरान कई श्रावक-श्राविकाओं ने विभिन्न तपस्याएं कर अपनी आस्था और आत्मसंयम का परिचय दिया।

पर्युषण पर्व के दौरान जर्मनी से बड़ीसादड़ी पहुंचे सार्थक कंठालिया ने 15 उपवास की कठिन तपस्या की। उनके साथ अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने भी तपस्या में भाग लिया।

तपस्या करने वालों में ओमप्रकाश कंठालिया के सुपुत्र सार्थक कंठालिया ने 15 उपवास किए। ज्योति, राजेंद्र नागौरी की धर्मसहायिका, ने 14 उपवास किए। हेमलता, जिन्हें गुड़िया के नाम से भी जाना जाता है और जो संदीप मोदी की धर्मसहायिका हैं, ने 9 उपवास किए। चंद्रप्रकाश नागौरी ने 8 उपवास, दिलीप कुमार नागौरी ने 7 उपवास, ज्ञानचंद डांगी ने 8 उपवास, पवन नलवाया ने 9 उपवास और केसर सिंह राजपूत ने 10 उपवास की तपस्या की।

इनके अलावा कई श्रावक-श्राविकाओं ने 5 और 3 उपवास सहित अन्य तपस्याएं भी पूरी कीं। पर्युषण पर्व के दौरान हुई इन तपस्याओं के साथ धर्म आराधना और आत्मसंयम का क्रम आठ दिनों तक जारी रहा।

संवत्सरी महापर्व पर साधुमार्गी संघ बड़ीसादड़ी की ओर से सभी तपस्वियों के लिए सामूहिक पारणे का इंतजाम किया गया। यह आयोजन छोटे साजनान के पंचायती भवन में हुआ। मंगलवार को समता भवन में तपस्वियों का स्वागत और अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर समाज के लोगों ने तपस्वियों की अनुमोदना की और उनके आत्मिक उत्थान तथा उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की। पर्युषण पर्व के समापन अवसर पर तपस्वियों के सम्मान और सामूहिक पारणे का आयोजन धार्मिक आराधना के क्रम का प्रमुख हिस्सा रहा।

Tags: