तस्वीर में जोगणिया माता मंदिर प्रांगण में कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में गवरी नृत्य प्रस्तुत करते दिख रहे हैं।

बेगूं, चित्तौड़गढ़। श्री जोगणिया माता शक्तिपीठ मंदिर प्रांगण में रविवार को मेवाड़ की धार्मिक एवं पारंपरिक लोक संस्कृति का प्रतीक गवरी नृत्य भव्य रूप से प्रस्तुत किया गया। भील समाज के कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुति ने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और लोगों का मन मोह लिया। धार्मिक आस्था के साथ यहां मेवाड़ की लोक संस्कृति की अनूठी झलक भी देखने को मिली।

गवरी नृत्य का नेतृत्व मोटा भाई गोवरिया ने किया। गवरी दल के मुख्य कलाकार कालूराम, गोदलाल, गोपीलाल एवं लोहान सहित अन्य कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा और लोक शैली में प्रस्तुतियां दीं। गवरी नृत्य दल तहसील भदेसर, जिला चित्तौड़गढ़ क्षेत्र से पहुंचा था।

कार्यक्रम के अवसर पर श्री जोगणिया माता शक्तिपीठ प्रबंध एवं विकास संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने सभी कलाकारों और गवरी नृत्य दल का स्वागत एवं अभिनंदन किया। संस्थान की ओर से कहा गया कि मेवाड़ की गवरी केवल लोकनृत्य नहीं, बल्कि भील समाज की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसी परंपराओं का संरक्षण कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी का दायित्व है।

रविवार को श्री जोगणिया माता शक्तिपीठ में माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं की भीड़ के चलते मंदिर परिसर में दिनभर नवरात्रि जैसा भक्तिमय वातावरण नजर आया। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचे।

इस अवसर पर अरविंद सेन, मोतिपुर, आसींद की ओर से माता रानी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसके बाद मंदिर परिसर में आने वाले करीब 3 हजार श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था की गई। श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

संस्थान अध्यक्ष सत्यनारायण जोशी ने बताया कि प्रत्येक रविवार को जोगणिया माता के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है और मंदिर परिसर में नवरात्रि जैसा भक्तिमय वातावरण देखने को मिल रहा है। उन्होंने गवरी दल के सभी कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए मेवाड़ की गौरवशाली धार्मिक एवं लोक सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया।

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