बड़ी सादड़ी में सभागार के भीतर आयोजित धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालु और वक्ता।

बड़ी सादड़ी में श्री सिद्ध पंचमुखी बालाजी सेवा संस्थान बड़ी सादड़ी की ओर से समाज में जागरण के उद्देश्य से प्रत्येक रविवार आयोजित होने वाली रामधुन के क्रम में 250वीं रामधुन का आयोजन किया गया। रामधुन प्रातः 6:45 बजे आनंद धाम श्री रामद्वारा चौक से प्रारंभ हुई और नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए श्री जैन दिवाकर प्रवचन सभागार पहुंची।

सभागार में श्री संघ एवं आयोजक श्री जैन दिवाकर महिला मंडल की ओर से रामधुन का स्वागत किया गया। इसके बाद सभागार में धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा में अर्पण प्रज्ञा जी मा सा आदि थाना 3 के आशीर्वचन हुए।

महाराज साहब ने प्रवचन में कहा कि हम सभी भगवान को तो मानते हैं, परंतु भगवान की नहीं मानते हैं। रामायण पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन मर्यादाओं को समर्पित एक आदर्श जीवन रहा है। उन्होंने माता-पिता की आज्ञा पालन, भाइयों के आपसी प्रेम, पति-पत्नी के आपसी संबंध सहित समाज में संबंधों के पालन को लेकर एक आदर्श प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम ने पारिवारिक और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अपने राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वहन किस प्रकार किया जाए, इसका भी आदर्श प्रस्तुत किया। आज की युवा पीढ़ी एक समय के बाद अपने निर्णय माता-पिता की अनुमति एवं सलाह के बिना करती है, जिसके कारण अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध होते हैं। अतः जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय माता-पिता और वरिष्ठ जनों के मार्गदर्शन में करने चाहिए।

धर्मसभा के अंत में अनिल कुमार मेहता एवं महिला मंडल से मधुबाला छाजेड़ ने रामधुन में पधारे सभी भक्तजनों का जैन समाज की ओर से आभार एवं अभिनंदन व्यक्त किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बालकों को पुरस्कार वितरित किए गए और प्रभावना का वितरण किया गया।

महासती अर्पण जी महाराज ने सभी भक्तों को नियमित व्याख्यान में आने का निमंत्रण दिया, जहां इस समय रामायण का पाठ हो रहा है। रामधुन और धर्मसभा के माध्यम से धार्मिक जागरण तथा पारिवारिक एवं सामाजिक मूल्यों के पालन का संदेश दिया गया।

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