निंबाहेड़ा में अर्हत रेखा श्री जी म.सा. के सान्निध्य में आध्यात्मिक शिविर सम्पन्न

निंबाहेड़ा में अर्हत रेखा श्री जी म.सा. के सान्निध्य में तीन दिवसीय आध्यात्मिक शिविर सम्पन्न, महिला शक्ति ने धर्म और आत्मबोध का लाभ लिया।

Update: 2026-07-14 14:23 GMT

शिविर में शामिल श्रद्धालु महिलाएं अनुशासित होकर धर्म आराधना करती हुईं।

पूज्या श्री अर्हत रेखा श्री जी म.सा. की पावन निश्रा में आयोजित त्रिदिवसीय आध्यात्मिक एवं व्यक्तित्व विकास शिविर श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में सम्पन्न हुआ। शिविर में सकल जैन समाज की महिला शक्ति ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर जिनशासन, आत्मस्वरूप एवं आदर्श श्राविका जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सूत्रों का लाभ प्राप्त किया।

शिविर के प्रथम दिवस का विषय "जिन शासन मेरा प्राण है" रखा गया। इस अवसर पर पूज्या साध्वी भगवंत ने प्रेरणादायी शैली में बताया कि मैत्रीभाव को अपनाकर पंथवाद जैसी संकीर्ण सोच को समाप्त करते हुए जिनशासन की महिमा को जीवन में सार्थक करना ही सच्ची आराधना है। उन्होंने चातुर्मास मैनेजमेंट के प्रथम सोपान को भी सरल एवं व्यवहारिक रूप में समझाया। प्रश्नोत्तरी, क्विज़ गेम तथा संगीतमय योग मुद्राओं के माध्यम से शिविर का वातावरण आनंदमय बना रहा। प्रथम दिवस के लाभार्थी शांतिलाल जी, चेतन जी एवं नमन जी मारवाड़ी परिवार रहे।

द्वितीय दिवस में "मैं शुद्ध स्वरूप आत्मा हूँ" विषय पर आत्मबोध कराया गया। पूज्या श्री जी ने सरल एवं सहज भाषा में आत्मा के वास्तविक स्वरूप की जानकारी देते हुए कहा कि प्रत्येक श्राविका को अपने स्वभाव और व्यवहार में सरलता, विनम्रता एवं पवित्रता को अपनाना चाहिए। इस दौरान चातुर्मास मैनेजमेंट के द्वितीय चरण की भी प्रेरक जानकारी दी गई। एल्फाबेट पेपर गेम, संगीतमय योग एवं अन्य रोचक गतिविधियों में सभी प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ सहभागिता की। द्वितीय दिवस का लाभ सकल श्रीसंघ ने प्राप्त किया।

शिविर के अंतिम दिवस का विषय "मैं प्रभु की श्राविका हूँ" रहा। पूज्या श्री अर्हत रेखा श्री जी म.सा. ने सतियों के प्रेरणादायी उदाहरणों के माध्यम से बताया कि एक महिला किस प्रकार आदर्श श्राविका बनकर अपने जीवन को धर्ममय बना सकती है। उन्होंने आगामी चातुर्मास में विशेष बातों का ध्यान रखते हुए अधिकाधिक धर्म आराधना करने का मार्गदर्शन भी प्रदान किया। तृतीय दिवस के लाभार्थी सतीश जी, नीतू जी, अक्षिता जी एवं अक्षत जी बाबेल परिवार रहे।

त्रिदिवसीय आध्यात्मिक शिविर का समापन पूज्या श्री अर्हत रेखा श्री जी म.सा. के मंगलिक के साथ भक्तिमय वातावरण में हुआ। तीनों दिनों तक महिला शक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति, अनुशासित सहभागिता और धर्म के प्रति उत्साह ने शिविर को सफल बनाया। उपस्थित श्राविकाओं ने ऐसे आध्यात्मिक एवं संस्कारप्रधान शिविरों के नियमित आयोजन की भावना व्यक्त करते हुए इसे चातुर्मास की प्रेरणादायी शुरुआत बताया।

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