मन की एकाग्रता जीवन की सबसे कठिन साधना, निकुंभ में आचार्य निश्चल मुनि का संदेश
निकुंभ के समता भवन में आचार्य निश्चल मुनि ने मन की एकाग्रता को सबसे कठिन साधना बताते हुए भक्ति, तप और संयम का संदेश दिया।
तस्वीर में निकुंभ कस्बे में स्थित समता भवन की इमारत का बाहरी और मुख्य द्वार का दृश्य दिखाई दे रहा है।
निकुंभ कस्बे के समता भवन में चातुर्मास के निमित्त 17वें दिवस आयोजित प्रवचन में आचार्य रामलाल के आज्ञानुवर्ती शिष्य आचार्य निश्चल मुनि ने मन की एकाग्रता को जीवन की सबसे कठिन साधना बताया। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को मन के स्वभाव और उसे सही दिशा में ले जाने के महत्व को विस्तार से समझाया।
आचार्य निश्चल मुनि ने कहा कि मानव मन एक योद्धा की तरह होता है, जिसे सहजता से जीतना मुश्किल होता है। मन का स्वभाव चंचल होता है, जो जीवन में कई परिस्थितियों को जन्म देता है। मन जैसा कहता है, व्यक्ति वैसा ही करने लगता है। मन को सही दिशा में ले जाकर ईश्वर भक्ति की ओर अग्रसर होना जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष है।
उन्होंने कहा कि मन को हमेशा सही दिशा की जरूरत होती है और सही दिशा मन की एकाग्रता, ईश्वर की निश्चल भक्ति, तप, त्याग, तपस्या और संयम साधना से ही प्राप्त हो सकती है। इसके लिए समय-समय पर गुरु की आज्ञा का पालन करना नितांत आवश्यक हो जाता है।
साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने प्रातःकालीन युवा शाखा संचालन एवं नियमित सामयिक करने के बारे में जानकारी दी। मंत्री सुरेश कुमार सहलोत ने प्रवचन के दौरान बाहर गांव से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं और अतिथियों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर धर्मसभा में सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। मुनि श्री के प्रवचन के दौरान कस्बे के कई अजैन श्रावक भी नियमित रूप से प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे हैं।