चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में भागवत कथा व अन्न क्षेत्र का शुभारंभ, जन्मोत्सव मनाया
संत दिग्विजय राम ने भक्ति और प्रहलाद-मीरा के प्रसंगों का वर्णन किया, समाधि पूजन के साथ संत भगतराम अन्न क्षेत्र शुरू हुआ।
तस्वीर में चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद सीपी जोशी संत का आशीर्वाद लेते हुए।
चित्तौड़गढ़ के रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत श्रीमद् भागवत कथा वाचन, संत भगतराम महाराज अन्न क्षेत्र के शुभारंभ, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव महोत्सव और समाधि पूजन कार्यक्रम आयोजित हुआ। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव महोत्सव में संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि भगवान सदैव भक्तों की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन भक्त भी मीरा बाई और प्रहलाद जैसे होने चाहिए। समय आने पर सृष्टि के पालनहार राजा बलि के महल में चौकीदार भी बन गए।
संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि यह संसार सरोवर है और काल मगरमच्छ है। भगवान को दिमाग में नहीं, दिल में विराजित करना चाहिए। उन्होंने भक्त प्रहलाद का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि प्रहलाद ने जीवन में बहुत संकट सहन किए। हिरण्यकश्यप ने उन पर खूब अत्याचार किए, लेकिन प्रहलाद का भगवान पर अटल विश्वास रहा। भक्त की रक्षा के लिए भगवान को खंभे से प्रकट होना पड़ा। उन्होंने कहा कि भगवान आज भी कण-कण में हैं, लेकिन भक्त भी मीरा बाई और प्रहलाद जैसे होने चाहिए।
संत ने राजा बलि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राजा बलि के आग्रह पर भगवान उनके महल में चौकीदार बन गए थे। तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर भगवान को चौकीदारी से मुक्त करवाया था। भगवान की अनुभूति के लिए मंदिर की आवश्यकता होती है। हर कार्य को भगवान का मानकर उनके चरणों में समर्पित कर देना चाहिए।
गजेन्द्र मोक्ष प्रसंग में संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि संसार सरोवर और काल मगरमच्छ है। माया और काया का कभी अभिमान नहीं करना चाहिए। समुद्र मंथन प्रसंग में उन्होंने कहा कि मंथन से निकले विष का भगवान शिव ने पान किया था, इसलिए वे नीलकंठ कहलाए। उन्होंने कहा कि रामायण जीना और भागवत मरना सिखाती है।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग में संत दिग्विजय राम महाराज ने कहा कि 5253 वर्ष पहले देवकी-वसुदेव के यहां भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। उन्होंने कृष्ण जन्म से लेकर कंस के वध तक का प्रसंग सुनाया। जन्मोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। श्रद्धालुओं ने कान्हा के जन्म पर एक-दूसरे को बधाइयां दीं और मुंह मीठा करवाया।
रामद्वारा के संत भगतराम महाराज की समाधि पूजन का कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन ही उनका देवलोक गमन हुआ था। इस मौके पर सांसद सीपी जोशी, संत दिग्विजय राम महाराज आदि ने संत भगतराम धार्मिक सेवा संस्थान के अन्न क्षेत्र का शुभारंभ कर भगतराम महाराज को याद किया। संत ने कहा कि सौभाग्यशाली हैं वे लोग जिन्होंने संत भगतराम महाराज के दर्शन किए।
भागवत कथा के दौरान आचार्य राम दयाल महाराज के प्रवचन का सीधा प्रसारण किया गया। आचार्य ने कहा कि जीवन अहंकार शून्य व भक्तिमय होना चाहिए। चित्तौड़गढ़ की धरा पावन है। संत भगताराम महाराज का आज निर्वाण दिवस है, जो सरल और सात्विक जीवन जीने और लोक कल्याण की भावना मन में रखते थे। अन्न क्षेत्र महापुरुषों की तपस्या का प्रसाद और विराट यज्ञ है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि आज जन्माष्टमी का भी पावन अवसर है। श्रीराम मर्यादा और श्रीकृष्ण कर्तव्य परायणता का बोध करवाते हैं। भगवान हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं। श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर अन्याय व अत्याचार के खिलाफ कदम उठाए और गीता का उपदेश दिया। भगवान श्रीकृष्ण के अन्तकरण से गीता का प्रादुर्भाव हुआ, जिसमें देश भक्ति और कर्तव्य परायणता का संदेश दिया गया है। आचार्य ने कहा कि लोग समझते हैं कि गीता सिर्फ बुजुर्गों के लिए है, यह गलत धारणा है। गीता युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सबके लिए है।