तस्वीर में भीलवाड़ा की कच्ची और खस्ताहाल सड़क से गुजरता एक डंपर ट्रक दिख रहा है।

भीलवाड़ा। नगर निगम और प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही के चलते शहर का शहरी इलाका इन दिनों धूल और खड्डों से बेहाल है। सीवरेज प्रोजेक्ट के नाम पर शहर की गली-गली और मुख्य सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया, लेकिन काम पूरा होने के करीब डेढ़ महीने बाद भी सड़कों की मरम्मत नहीं हो सकी है। इससे क्षेत्रवासियों को धूल और बदहाल रास्तों के बीच आवाजाही करनी पड़ रही है।

शहर से जवाहर नगर होकर गुजरने वाली तथा पांसल, समोड़ी, कोटड़ी, दरीबा, पीथास और बागोर जैसे दर्जनों गांवों व कस्बों को जोड़ने वाली मुख्य सड़क लंबे समय से बदहाल पड़ी है। दावों के मुताबिक सीवरेज का काम करीब एक से डेढ़ महीने पहले ही पूरा हो चुका है, लेकिन ठेकेदार और प्रशासन की अनदेखी के कारण सड़क का पुनर्निर्माण तो दूर, पेचवर्क तक नहीं कराया गया। जवाहर नगर की अंदरूनी गलियों की स्थिति भी ऐसी ही है, जिन्हें खोदकर छोड़ दिया गया है।

सड़कों से लगातार उड़ती धूल-मिट्टी के कारण स्थानीय निवासियों और राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है। सांस और आंखों की बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। सड़क किनारे दुकानदारों के लिए भी स्थिति मुश्किल हो गई है। दुकानों में बैठना और सामान बेचना दूभर हो चुका है। दुकानदारों का कहना है कि उड़ती धूल के कारण ग्राहक दुकानों की ओर आने से कतरा रहे हैं, जिससे उनका व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है।

क्षेत्रीय लोग और व्यापारी प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं। दर्जनों शिकायतें दिए जाने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की ओर से समस्या का समाधान नहीं किया गया। लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि सड़कों की बदहाली और धूल से पैदा हो रही परेशानी के बावजूद जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

प्रशासन की अनदेखी से नाराज क्षेत्रवासियों और व्यापारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़कों की मरम्मत और धूल से राहत का काम शुरू नहीं हुआ तो वे चुप नहीं बैठेंगे। जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होगी। लोगों ने इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होने की बात कही है। सीवरेज का काम पूरा होने के बावजूद सड़कों की बदहाल स्थिति अब क्षेत्रवासियों और व्यापारियों के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है।

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