तस्वीर में भीलवाड़ा में सत्संग के दौरान हॉल में बैठकर प्रवचन सुनतीं श्रद्धालुओं की भीड़।
रामस्नेही सम्प्रदाय के आचार्य ने नेपाल बाढ़ त्रासदी पर दुख जताया और 13 से 20 सितंबर तक श्रीमद् भागवत कथा आयोजन की घोषणा की।
तस्वीर में भीलवाड़ा में मंच पर दो माइकों के सामने बैठकर सत्संग देते स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज।
आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण चरित्र का गुणगान करते हुए कहा कि शरीर का रंग काला हो तो कोई बात नहीं, लेकिन मन काला नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का रंग काला था, लेकिन उनके विचार निराले थे। भगवान का नाम जपते हुए यदि वह हमारा मन भी चुरा ले तो यही सच्ची भक्ति है।
भीलवाड़ा, 4 सितम्बर। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार को जन्माष्टमी के अवसर पर दैनिक सत्संग में कृष्ण चरित्र की चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे रामस्नेही सम्प्रदाय का इष्ट राम है, लेकिन धर्म कृष्ण है। भगवान कृष्ण का जीवन प्रेम, कर्म और कर्तव्य की प्रेरणा देता है।
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन हमें प्रेरणा प्रदान करता है कि जीवन में प्रेम की बांसुरी बजाएं, लेकिन जब जरूरत पड़े तो कृष्ण की तरह बांसुरी छोड़ सुदर्शन चक्र धारण कर राष्ट्रद्रोहियों एवं आतंकियों के छक्के भी छुड़ाएं और भारत को आतंक मुक्त बनाएं। भगवान कृष्ण का चरित्र हृदय को स्पर्श करने वाला है।
उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व जन्माष्टमी के रूप में गोविन्द का प्राकट्योत्सव मना रहा है। भगवान का जन्म नहीं, अवतार होता है, इसलिए उनका जन्मोत्सव नहीं बल्कि प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। जन्म के लिए शरीर और प्राकट्य के लिए संकल्प चाहिए। जब धरती पर अन्याय व अत्याचार बढ़ता है तो भगवान अवतार लेकर प्रकट होते हैं। उन्होंने कहा कि राम अवतार मर्यादा के लिए और कृष्ण अवतार कर्मवाद के लिए है। व्यक्ति को सीता जैसी पत्नी चाहिए तो स्वयं को राम जैसा बनकर दिखाना होगा।
जन्माष्टमी के उल्लास के साथ यह अवसर पूज्य सद्गुरू चरित्र सम्राट तत्वज्ञानी भगतरामजी महाराज के निर्वाण दिवस के कारण विषाद के क्षण भी लेकर आया। आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि सहजता एवं सरलता के धनी गुरूदेव भगतरामजी ने इसी दिन चित्तौड़ की धरती पर स्वामी रामचरणजी महाराज के चरणों में देह त्याग किया था।
उन्होंने कहा कि पूज्य गुरूदेव रामस्नेही सम्प्रदाय के तानसेन होकर प्रभु भक्ति में समर्पित थे और भजन की ऐसी धारा छेड़ते थे कि सुनने वाले के कदम वहीं थम जाते थे। उन्होंने रामनाम को प्राप्त कर लिया था। उनकी तपस्या का प्रभाव अलौकिक व अनूठा था। आचार्यश्री ने गुरू चरणों में प्रणाम कर उनके जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाए और कहा कि ऐसे सद्गुरू की कृपा एवं प्रताप से ही वह आज समाज की सेवा के लिए समर्थ बने हैं।
सत्संग के अंत में आचार्य रामदयाल महाराज ने नेपाल में भयंकर बाढ़ के कारण हुई त्रासदी पर दुःख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि जो इस त्रासदी का शिकार बने, उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करे और पीड़ितों को संबल प्रदान करे। उन्होंने नाम स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे नेपाल को इस त्रासदी से मुक्ति मिल सके।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में माणिक्यनगर रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेद पाठी विद्वान भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे।
श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के दौरान प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा तथा सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा।