फूलियाकलां में 5 मांगों को लेकर छात्र नेताओं का आमरण अनशन शुरू, प्रशासन में मचा हड़कंप

फूलियाकलां में 5 सूत्रीय मांगों को लेकर दो छात्र नेता आमरण अनशन पर बैठे, स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल समस्याओं को लेकर आंदोलन शुरू।

Update: 2026-07-29 10:08 GMT

तस्वीर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर के बाहर जमीन पर बैठे छात्र नेता और युवा, जहां गले में फूल-माला पहने दो छात्र नेता अनशन पर बैठे नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा जिले के फूलियाकलां कस्बे में ज्वलंत जनसमस्याओं और शिक्षा-स्वास्थ्य से जुड़ी 5 प्रमुख मांगों को लेकर दो छात्र नेताओं ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। बुधवार सुबह सवा नौ बजे छात्र नेता शिवराज आचार्य और दिनेश माली कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) भवन के बाहर अनशन पर बैठ गए।

छात्र नेताओं के इस कदम के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वहीं स्थानीय ग्रामीणों ने भी अनशनकारियों को समर्थन देते हुए उनकी मांगों के समाधान की मांग उठाई है।

छात्र नेताओं ने फूलियाकलां क्षेत्र की पांच प्रमुख समस्याओं को लेकर आंदोलन शुरू किया है। इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में स्थायी चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की तत्काल नियुक्ति, कस्बे में पेयजल की अनियमित आपूर्ति को सुधारकर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करना, क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाना, महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के नए भवन का निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाना और श्री कल्याण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में रिक्त चल रहे शिक्षकों के पदों को भरना शामिल है।

छात्र नेता शिवराज आचार्य ने बताया कि क्षेत्र की इन मूलभूत समस्याओं को लेकर कई बार शासन-प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहा कि लगातार अनदेखी के कारण छात्रों और ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब जब तक मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक अनिश्चितकालीन अनशन जारी रहेगा।

अनशन शुरू होने की जानकारी मिलते ही कस्बे के कई नागरिक और युवा सीएचसी परिसर पहुंचे और छात्र नेताओं का समर्थन किया। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी युवाओं को भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है, जो क्षेत्र की समस्याओं की गंभीरता को दर्शाता है।

फूलियाकलां में शुरू हुआ यह आंदोलन अब स्थानीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बन गया है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि मांगों के समाधान तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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