भीलवाड़ा: भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान का हुआ शुभारंभ
आचार्य पुलकसागरजी महाराज के सानिध्य में आयोजित अनुष्ठान में 25 हवन कुंडों पर श्रद्धालु भाग्यांक के अनुसार आहुतियां दे रहे हैं।
भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित पार्श्वनाथ विधान अनुष्ठान में धार्मिक परिधान पहने आरती एवं पूजा करतीं श्राविकाएं।
भीलवाड़ा में नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत माहौल में भगवान पार्श्वनाथ विधान एवं नवग्रह जाप अनुष्ठान का शुभारंभ हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित इस अनुष्ठान में राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ का सानिध्य मिल रहा है। भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में आयोजित सौभाग्य संवर्धक महोत्सव की पूर्णाहुति 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन होगी।
अनुष्ठान आयोजक श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि अनुष्ठान के दौरान श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना की और आचार्यश्री के मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंड में आहुतियां अर्पित कीं। हवन में आहुतियां देने वाले श्रावक-श्राविकाएं सौधर्म इन्द्र और इन्द्राणी की विशेष वेशभूषा में शामिल हुए। अनुष्ठान के माध्यम से सर्वमंगल और सुख-शांति की कामना की गई।
आचार्यश्री ने अनुष्ठान का महत्व बताते हुए कहा कि नवरात्रि में इस साधना के माध्यम से जीवन के कष्टों और बाधाओं को दूर करने के साथ खुशहाली लाई जा सकती है। भाग्यांक के आधार पर अनुष्ठान में बैठने वाले श्रावक-श्राविकाओं को उनके ग्रहों के रंगों के अनुसार वस्त्र प्रदान किए गए हैं। भाग्यांक, मूलांक या नामांक के आधार पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालु इस अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं।
भीलवाड़ा में पहली बार हो रहे इस विशिष्ट आयोजन के तहत सूर्यमहल में प्रतिदिन सुबह 7 से 10 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान किया जा रहा है। इसमें भीलवाड़ा के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं के साथ देश के विभिन्न स्थानों से आए 100 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं भी शामिल हुए हैं।
अनुष्ठान के लिए पांडाल में 25 हवन कुंड बनाए गए हैं। प्रत्येक कुंड पर चार-चार अनुष्ठानकर्ता बैठकर आहुतियां अर्पित कर रहे हैं। भाग्यांक और ग्रहों के आधार पर आचार्यश्री के मंत्रोच्चार के साथ हवन की प्रक्रिया संपन्न हो रही है। विधान एवं अनुष्ठान में शामिल प्रत्येक श्रावक-श्राविका को आचार्यश्री की ओर से अभिमंत्रित माला प्रदान की गई है। नवरात्रि के दौरान चल रही इस आराधना का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन सौभाग्य संवर्धक महोत्सव की पूर्णाहुति के साथ होगा।