भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने अफीम नीति 2026-27 में सुधार के लिए भेजा सुझाव पत्र

विधायक अशोक कोठारी ने कोटा में उप नारकोटिक्स आयुक्त को पत्र लिखकर अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं और डोडा चूरा क्रय नीति में बदलाव की मांग की है।

Update: 2026-06-02 14:05 GMT

भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने अफीम नीति में बदलाव के लिए उप नारकोटिक्स आयुक्त कोटा को पत्र सौंपा।

भीलवाड़ा, 2 जून। भीलवाड़ा के विधायक अशोक कुमार कोठारी ने अफीम नीति 2026-27 को अधिक किसान हितैषी बनाने के संकल्प के साथ राजस्थान के कोटा स्थित उप नारकोटिक्स आयुक्त को एक विस्तृत सुझाव पत्र प्रेषित किया है। विधायक कोठारी ने अपने पत्र के माध्यम से अफीम उत्पादक किसानों की समस्याओं और उनकी व्यावहारिक आवश्यकताओं को केंद्र में रखते हुए नीति में आमूल-चूल सुधारों की पुरजोर वकालत की है, ताकि किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ राष्ट्रहित में भी सकारात्मक परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

विधायक कोठारी ने नीतिगत सुधारों की श्रृंखला में सबसे प्रमुख सुझाव देते हुए कहा कि वर्तमान में 0.10 हेक्टेयर के अफीम पट्टे के लिए केवल एक ही भूखंड पर खेती की अनुमति का प्रावधान है। उन्होंने इसके स्थान पर एक से अधिक भूखंडों पर खेती की अनुमति देने का आग्रह किया है, ताकि परिवार के सभी भाइयों को अफीम खेती का लाभ मिल सके और आपसी पारिवारिक विवादों की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। अफीम एवं सीपीएस पद्धति के अंतर्गत डोडा क्रय दर में बढ़ोतरी की मांग उठाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों को उनकी कठिन मेहनत का उचित प्रतिफल मिलना अनिवार्य है। साथ ही, गुणवत्ता संबंधी औसत को प्रति हेक्टेयर 4.2 किलोग्राम से घटाकर 4 किलोग्राम करने का सुझाव दिया गया है, ताकि केवल औसत की मामूली कमी के कारण किसानों के पट्टे निरस्त न हों।

विधायक कोठारी ने अफीम फसल को 'फसल बीमा योजना' के दायरे में लाने, पोस्तदाना के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित करने और सीपीएस पद्धति के औसत उत्पादन मानकों में किसान हितैषी संशोधन करने की मांग पर जोर दिया है। उन्होंने सीपीएस एवं चिराई पद्धति के किसानों के बीच पट्टा क्षेत्रफल को लेकर व्याप्त असमानता को मिटाने की आवश्यकता जताई। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1990 से औसत उत्पादन कम होने के कारण निरस्त किए गए पात्र किसानों को पुनः पट्टे जारी करने, मार्फिन गुणवत्ता की तकनीकी जानकारी के लिए विभागीय कार्यशालाएं आयोजित करने तथा किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का सुझाव भी उन्होंने प्रमुखता से दिया है।

पूर्ववर्ती व्यवस्था का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि सरकार द्वारा डोडा चूरा क्रय किए जाने से किसानों को अतिरिक्त आय का साधन प्राप्त होता था, किंतु वर्तमान व्यवस्था में इसे नष्ट कराए जाने से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से पुनः डोडा चूरा क्रय करने की नीति पर विचार करने या फिर नष्ट करने की स्थिति में किसानों को उचित अनुदान अथवा मुआवजा प्रदान करने की मांग की है। साथ ही, अवैध डोडा चूरा प्रकरणों में केवल नामजदगी के आधार पर की जाने वाली दंडात्मक कार्रवाई के मामलों में संवेदनशीलता और न्यायोचित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया है। विधायक अशोक कोठारी ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया है कि नारकोटिक्स विभाग किसान और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए इन सुझावों पर सकारात्मक विचार करेगा और आगामी अफीम नीति में आवश्यक संशोधन कर अन्नदाता को बड़ी राहत प्रदान करेगा।

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