तस्वीर में भीलवाड़ा के जैन मंदिर में फूलों और वस्त्रों से श्रृंगारित भगवान पार्श्वनाथ की मुख्य प्रतिमा और अन्य जिनबिंब नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा, 16 सितम्बर। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज संसघ के सानिध्य में शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में बुधवार से दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की आराधना विधि-विधान के साथ प्रारंभ हुई। पर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की गई। इसके साथ ही दस दिवसीय पाप नाशनम् शिविर भी शुरू हुआ, जिसमें 600 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं शामिल होकर पर्युषण की धर्म आराधना कर रहे हैं।

पहले दिन आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में प्रभु पार्श्वनाथ का अभिषेक किया गया। चक्रवर्ती के साथ इन्द्र रूप में श्रावक अभिषेक के लिए उमड़े तो सूर्यमहल में ऐसा दृश्य बना, मानो सुमेरू पर्वत पर हजारों इन्द्र पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक करने पहुंचे हों। श्रद्धा और भक्ति के बीच इन्द्र बने श्रावकों ने कतार में लगकर अभिषेक किया। भगवान की भक्ति में श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे तथा नाचते-गाते हुए पार्श्वनाथ प्रभु की आराधना की। इस दौरान गरबा नृत्य भी किया गया।



आचार्य पुलकसागर महाराज ने दशलक्षण पर्व के पहले दिन संदेश देते हुए कहा कि क्रोध का अभाव होना ही उत्तम क्षमा धर्म है। क्रोध के नियमित उपस्थित होने पर भी जो क्रोध नहीं करता, उसमें क्षमा धर्म प्रकट होता है। क्षमा का अर्थ सहन करना और शांत करना है। क्षमा वास्तव में एक अलंकरण है, जो शत्रु या मित्र होने पर सहिष्णुता का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने कहा कि क्षमा वीरों का आभूषण है। मन की गांठ खोलने को ही क्षमा कहते हैं। क्रोध पर अंकुश लगाने का उत्तम उपाय क्षमा धर्म है। क्रोध को पैदा ही नहीं होने देना है और किसी कारण क्रोध आ जाए तो नम्रता से उसे विफल कर देना है। उत्तम क्षमा धर्म की आराधना का उद्देश्य सहनशीलता का विकास एवं सभी के प्रति क्षमा भाव रखना है।

आचार्यश्री ने दशलक्षण पर्व की आराधना कर रहे कई श्रावक-श्राविकाओं को उपवास व्रत का प्रत्याख्यान भी कराया।

श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण के पहले दिन चक्रवर्ती बनकर भगवान का प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य राजेश जैन गया वालों ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य पदमचंद, गुणमाला पाटनी जयपुर ने प्राप्त किया। सांयकालीन महाआरती का सौभाग्य सोमेश वत्सल ठग परिवार को प्राप्त होगा।

दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन गुरुवार को उत्तम मार्दव धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी।

इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति होगी। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन होगा। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन होंगे। इसके बाद आहारचर्या होगी। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं होंगी। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना होगी। शाम 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। दशलक्षण पर्व सम्पन्न होने पर 27 सितम्बर को सामूहिक क्षमावाणी का आयोजन होगा।

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