किंग कोबरा के डंसने के बाद डेढ़ घंटे में दी गईं 25 ASV डोज, जहाजपुर अस्पताल के डॉक्टरों ने बचाई महिला की जान

भीलवाड़ा के जहाजपुर में किंग कोबरा के डंसने के बाद महिला को डेढ़ घंटे में 25 ASV डोज दी गईं। डॉक्टरों की तत्परता से बची जान, जानिए पूरा मामला।

Update: 2026-07-28 07:48 GMT

तस्वीर में जहाजपुर उपजिला चिकित्सालय के वार्ड में बेड पर बैठी महिला मरीज के साथ डॉक्टर और एक अन्य व्यक्ति नजर आ रहे हैं।

भीलवाड़ा के जहाजपुर उपजिला चिकित्सालय में चिकित्सकों की तत्परता और परिजनों की सजगता से किंग कोबरा के डंसने के बाद एक महिला की जान बचा ली गई। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची महिला को डॉक्टरों ने महज डेढ़ घंटे के भीतर 25 एंटी स्नेक वेनम (ASV) की डोज देकर उपचार शुरू किया, जिसके बाद उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

घटना जहाजपुर के बिहाड़ा रोड स्थित एक ईंट-भट्टे की है। छत्तीसगढ़ निवासी कविता पत्नी रमेश काटेकर सोमवार तड़के करीब 6 बजे ईंट-भट्टे पर काम कर रही थीं। इसी दौरान उन्हें जहरीले कोबरा ने डस लिया। घटना के बाद परिजनों ने अंधविश्वास या झाड़-फूंक में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत उन्हें जहाजपुर उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया। पहचान के लिए परिजन कोबरा को मारकर भी अपने साथ अस्पताल लेकर पहुंचे।

अस्पताल में महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नईम अख्तर ने तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कराया। डॉ. अख्तर ने बताया, “कोबरा का जहर न्यूरोटॉक्सिक और हीमोटॉक्सिक होता है। यह सीधा नसों और खून पर असर डालता है। अगर कुछ मिनट की भी देरी होती, तो मरीज को बचाना नामुमकिन हो जाता।” इसके बाद अस्पताल की टीम ने बिना समय गंवाए लगातार उपचार करते हुए डेढ़ घंटे के भीतर महिला को एंटी स्नेक वेनम की 25 डोज दीं।

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) डॉ. दिलीप मीणा ने बताया कि त्वरित उपचार मिलने से महिला के सभी वाइटल पैरामीटर अब सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि मरीज की स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर उसे अगले 48 घंटे तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।

घटना के बाद डॉ. दिलीप मीणा और डॉ. नईम अख्तर ने संयुक्त रूप से आमजन से अपील की कि मानसून के दौरान कोबरा, करैत और वाइपर जैसे बेहद जहरीले सांपों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में झाड़-फूंक या झोलाछाप के चक्कर में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां एंटी-वेनम की सुविधा उपलब्ध रहती है। यह मामला समय पर उपचार, चिकित्सकों की मुस्तैदी और परिजनों की सजगता के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है।

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