तस्वीर में सवाई माधोपुर नगर परिषद में पदभार ग्रहण समारोह के दौरान मौजूद सभापति व अन्य लोग।   

अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन उसकी संगति से प्रभावित होता है। संसार के बजाय सत्संग का संग करने से जीवन पवित्र एवं पावन बन जाता है। उन्होंने कहा कि अपात्र का साथ अपमान, अपयश और हानि का कारण बनता है, जबकि सुपात्र के साथ जुड़ने से महिमा बढ़ती है।

आचार्यश्री ने ये विचार ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत गुरुवार को आयोजित नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैसी हमारी संगति होगी, वैसा ही हमारा जीवन बन जाएगा। अपात्र के साथ उत्तम वस्तु भी अपवित्र हो जाती है। यदि सुपात्र के साथ अपात्र जुड़ जाए तो उसकी भी महिमा बढ़ जाती है। इसलिए जीवन में हमेशा सुपात्र के साथ जुड़ने का लक्ष्य रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज कहते हैं कि आत्मा अजर, अमर और अविनाशी है, लेकिन शरीर के संग के कारण उस पर सुख-दुःख के आरोप लगते हैं। शरीर अपात्र और आत्मा सुपात्र है। इसलिए आत्मा शरीर का साथ करे तो दुःखी रहेगी, जबकि शरीर आत्मा का साथ करे तो सुखी रहेगा।


 


आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि कुसंग का फल अवश्य मिलता है। ज्ञान जब अपात्र के पास आता है तो उसका दुरुपयोग होता है। ज्ञान चिंतन का विषय होता है। माया से जगत चलता है, लेकिन राम से आत्मा का उद्धार होता है। यज्ञ, दान व ताप बुद्धिमान व्यक्ति को पावनता प्रदान करते हैं। विद्या ज्ञान के लिए, अर्थ उपकार के लिए और शक्ति सेवा के लिए होती है।

उन्होंने कहा कि अपात्र के पास थोड़ी भी बुद्धि आ जाए तो वह अहंकारी हो जाता है। अपात्र का साथ हमेशा नुकसान देने वाला होता है। उन्होंने यह भी कहा कि हम जैसा व्यवहार जगत में करेंगे, वैसा ही व्यवहार हमें परभव में प्राप्त होने वाला है। शब्दों का अर्थ काल और परिस्थिति के अनुसार बदल सकता है, इसलिए कभी शब्द को नहीं, उसके भावार्थ को समझना चाहिए।

प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास एक बस में आग लगने से 9 यात्रियों की मौत पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के जल्द विषाद मुक्त होने के लिए परमात्मा से प्रार्थना की।

आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। संत प्रीतमराम ने भजन की प्रस्तुति दी। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की।

‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आचार्य रामदयाल महाराज के अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार से तीन दिवसीय विशेष आयोजन शुरू होंगे। पहले दिन शुक्रवार सुबह रामस्नेही चिकित्सालय के भामाशाहों, नेत्रदान करने वालों के परिजनों एवं सेवा कार्यों में सहयोग करने वालों का आचार्यश्री के सानिध्य में सम्मान किया जाएगा। सायंकालीन आरती के बाद देश के विभिन्न स्थानों से आने वाले भक्तों द्वारा रामद्वारा धाम में भजन संध्या का आयोजन होगा।

आचार्य रामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितम्बर को सुबह 9 बजे से आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर को विराट संत सम्मेलन का आयोजन होगा। इसी दिन दोपहर 2 बजे एक पखवाड़ा चलने वाले वाणीजी के सामूहिक पाठ का शुभारंभ होगा। वाणीजी का सामूहिक पाठ 28 सितम्बर से नियमित होगा।

सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय होने वाली संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। आचार्य रामदयालजी महाराज के अवतरण दिवस को लेकर आयोजित ये कार्यक्रम सत्संग, सेवा और आध्यात्मिक आयोजन की श्रृंखला के रूप में जारी रहेंगे।

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